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कलेक्टरों की निष्क्रियता ने शासकीय भूमि को बना दिया वक्फ संपत्ति : 77 करोड़ की जमीन के नुकसान पर सीएजी ने उठाये सवाल

77 करोड़ की जमीन के नुकसान पर सीएजी ने उठाये सवाल
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admin

Feb 23, 202612:16 PM

भोपाल। मध्यप्रदेश में करीब 77 करोड़ रूपये की शासकीय भूमियों को वक्फ भूमि बना दिया गया। वर्ष 2018-23 के बीच राज्य के 20 जिलों में हुई इस बंदरबाट का खुलासा कैग यानी भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट ने किया है। कैग ने इस मामले में न केवल कलेक्टरों की निष्क्रियता को जिम्मेदार ठहराया है बल्कि, वक्फ बोर्ड के अधिकारियों व जिला प्राधिकारियों के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई को जरूरी बताया है।

इतना ही नहीं रिपोर्ट में बताया गया है कि संबंधित जिलों के कलेक्टरों ने इन पंजीकरण प्रक्रियाओं को रोकने या निरस्त करने के लिए प्रभावी दिशा-निर्देश जारी नहीं किए। कुछ मामलों में आपत्तियां दर्ज की गईं, पर इसके बावजूद पंजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ी और संपत्तियां वक्फ बोर्ड के नाम दर्ज हो गईं। यदि राजस्व रिकॉर्ड में भूमि का स्वामित्व स्पष्ट था तो संबंधित विभागों के बीच समन्वय क्यों नहीं हुआ। इसके साथ ही कैग ने स्पष्ट किया है कि यह सिर्फ तकनीकी विसंगति नहीं मानी जा सकती है, यह तो निगरानी और जवाबदेही की कमी का साफ मामला दिखाई देता है। क्योंकि क्या पंजीयन विभाग, राजस्व विभाग और वक्फ बोर्ड के बीच सूचना का आदान-प्रदान पर्याप्त नहीं था।

सामुदायिक उपयोग की इन संपत्तियों को बनाया गया वक्फ संपत्ति

सामुदायिक उपयोग की जिन संपत्तियों को वक्फ संपत्ति बनाया गया है उनमें आगर मालवा के सुसनेर क्षेत्र का जमुनिया गांव, अनूपपुर के कोटमा और बिजुरी क्षेत्र, बालाघाट, भिंड का मेहगांव, भोपाल का हुजूर क्षेत्र, बुरहानपुर, छतरपुर, देवास और टीकमगढ़ के साथ भोपाल के हुजूर क्षेत्र में मस्जिद हिनोतिया, मदीना मस्जिद महावडी, कब्रिस्तान कमलानगर और कब्रिस्तान कानासेया का उल्लेख विशेष रूप से किया गया है। इसी तरह बुरहानपुर की मदीना मस्जिद मदरसा, छतरपुर की वक्फ ईदगाह और दरगाह हजरत सैयद वली कब्रिस्तान व कुआं, देवास और टीकमगढ़ के कब्रिस्तान भी सूची में शामिल हैं । इनमें से कई संपत्तियां सामुदायिक उपयोग के लिए आरक्षित भूमि बताई गई हैं, जिससे विवाद और गहरा गया है।

हाथ से गई 77 करोड़ की 2 लाख वर्ग मीटर भूमि

प्रदेश के 20 जिलों में सामुदायिक उपयोग की भूमियों की संख्या भले ही 33 है। बावजूद इसके 77 करोड़ रूपये मूल्य की इन भूमियों का रकवा 2,09,639.48 वर्ग मीटर बताया गया है। मजेदार बात यह कि मौजूदा समय में यह संपत्तियां वक्फ बोर्ड के नाम पंजीकृत पाई गई हैं। जबकि यह पूरी तरह से राजस्व अभिलेखों में स्पष्ट रूप से सरकारी भूमि के रूप में दर्ज थीं। बावजूद इसके कई संपत्तियों का पंजीकरण हाल के वर्षों में हुआ है, जिससे तकनीकी त्रुटि की संभावना भी कम प्रतीत होती है।

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