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भोपाल। मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव ने शुक्रवार को राजधानी भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में जनगणना-2027 पर केन्द्रित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन का शुभारंभ किया। इस दौरान जनगणना पर आधिारत एक लघु फिल्म भी प्रदर्शित की। प्रशिक्षण सत्र में मुख्य सचिव अनुराग जैन और प्रदेशभर के संभागायुक्त, जिला कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त और अन्य सीनियर अधिकारी मौजूद थे।
प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि जनगणना देश की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण डाटा प्रक्रिया है। इसके आधार पर सरकार की योजनाएं बनती हैं, संसाधनों का वितरण तय होता है और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास को पहुंचाने की रणनीति तैयार होती है। उन्होंने आगामी समय में होने वाली जनगणना को पिछली जनगणना से अलग बताते हुए कहा है कि इसमें स्पष्टता, पारदर्शिता और निष्पक्षता सर्वोपरि रहनी चाहिए।
शुद्धता और पारदर्शिता के साथ निभाना है दायित्व
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इस बार की जनगणना भले ही आंठवीं है, लेकिन सबसे अलग है। कोविड के कठिन काल में स्वाभाविक रूप से जनगणना संभव नहीं थी, लेकिन अब हमें अधिक शुद्धता और पारदर्शिता के साथ यह दायित्व निभाना है। गणनाओं की शुद्धता और बारीकियों के लिए प्रशिक्षण हुआ है, अब प्रतिबद्धता और निष्पक्षता सबसे पहली शर्त है।
कई अर्थ निकाले जाएंगे जनगणना के
सीएम मोहन यादव ने जनगणना के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि जनगणना के कई अर्थ निकाले जाएंगे, इसलिए स्पष्टता, पारदर्शिता और निष्पक्षता सर्वोपरि रहनी चाहिए। 1931 के बाद सामाजिक स्तर की इस प्रकार की जनगणना पहली बार हो रही है, हम सब मिलकर एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाने जा रहे हैं। विकास का कारवां भी बढ़े और व्यवस्थाओं का नियंत्रण भी हाथ में रहे।
विकास के साथ संवेदनशीलता अनिवार्य
उन्होंने अधिकारियों से मानवीय संवेदनाएं ध्यान में रखकर जनगणना करने पर जोर देते हुए कहा कि किसी का मकान, जमीन या दुकान प्रभावित होती है तो उसके मन का लगाव भी समझना होगा, विकास के साथ संवेदनशीलता अनिवार्य है। उन्होंने त्योहारों के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतने को लेकर अधिकारियों से कहा कि जनगणना के दौरान पड़ने वाले महाशिवरात्रि और होली जैसे पर्वों पर प्रशासन हाई अलर्ट पर रहे। आदर्श होली ऐसी हो कि लोगों को कष्ट कम हो और सामाजिक समरसता की भावना प्रकट हो।
प्रस्तुत होने चाहिए सौहार्द्र के बेहतर उदाहरण
दक्षता के आधार पर परस्पर सौहार्द के बेहतर उदाहरण प्रस्तुत होने चाहिए। राज्य सरकार वर्ष 2026 को श्किसान कल्याण वर्षश् मना रही है। 2026 किसान कल्याण वर्ष के रूप में घोषित है। कृषकों को किसी प्रकार की कठिनाई नहीं आनी चाहिए। नरवाई जलाने की समस्या को स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के आधार पर शून्य तक लाने का प्रयास करें। इसके साथ ही दलहन-तिलहन के उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में ठोस प्रयास करें।
प्रशिक्षण में दी जा रही अहम जानकारियां
प्रशिक्षण सत्र में अधिकारियों को निम्न विषयों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया जा रहा है-
जनगणना 2027 की नीति, समय-सीमा और कार्यप्रणाली।
पूछे जाने वाले प्रश्नों की रूपरेखा।
डिजिटल टूल्स और मोबाइल ऐप्स का उपयोग।
जनगणना कर्मियों की नियुक्ति प्रक्रिया।
प्रशिक्षण, फंड वितरण और उपयोगिता प्रमाण पत्र।
फील्ड स्तर पर आने वाली चुनौतियां।
सीएमएमएस, एचएलबीसी जैसे टूल्स की मॉनिटरिंग प्रणाली।
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