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नई दिल्ली। भारत में आगामी जनगणना की तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने सोमवार को जानकारी दी कि जनगणना-2027 का पहला चरण अप्रैल 2026 से कई राज्यों में शुरू किया जाएगा। यह प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी, जिसमें पहले चरण में मकानों की सूची तैयार करना और आवास से जुड़ी जानकारी जुटाना शामिल है, जबकि दूसरे चरण में जनसंख्या से संबंधित विस्तृत आंकड़े एकत्र किए जाएंगे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि जनगणना के लिए 1 मार्च 2027 को संदर्भ तिथि तय की गई है। हालांकि, हिमपात प्रभावित क्षेत्रों जैसे लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लिए यह तिथि 1 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। इस संदर्भ तिथि का उद्देश्य पूरे देश में एक समान समय पर सटीक और भरोसेमंद डेटा जुटाना है।
मकानों-भवनों का तैयार किया जाएगा विवरण
उन्होंने बताया कि पहले चरण में सभी मकानों और भवनों का विवरण तैयार किया जाएगा, जिसमें उनकी स्थिति, उपलब्ध सुविधाएं और संपत्तियों से जुड़ी जानकारी शामिल होगी। इसके साथ ही भवनों की जियो-टैगिंग की जाएगी और प्रत्येक को एक यूनिक आईडी दी जाएगी। यह चरण अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच पूरा किया जाएगा।
जनगणना प्रक्रिया में डिजिटल तकनीक का होगा इस्तेमाल
नारायण ने यह भी कहा कि इस बार जनगणना प्रक्रिया में डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा। नागरिकों को स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने की सुविधा दी जाएगी, जिससे प्रक्रिया अधिक तेज और पारदर्शी बनेगी। यह स्व-गणना सुविधा गृह सूचीकरण अभियान से 15 दिन पहले उपलब्ध कराई जाएगी।
प्रक्रियों में राज्यों की होगी अहम भूमिका
दूसरे चरण में जनसंख्या गणना की जाएगी, जिसमें आयु, लिंग, शिक्षा, व्यवसाय और जाति जैसे पहलुओं से संबंधित डेटा एकत्रित किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की अहम भूमिका होगी और उनके प्रशासनिक तंत्र को जमीनी स्तर पर सक्रिय किया गया है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने इस कार्य के लिए लगभग 11,718 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। साथ ही, लाखों गणनाकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है और डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मजबूत व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।
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