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नई दिल्ली। एक दिन पहले यानि सोमवार को हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान कई कांग्रेस विधायकों ने पार्टी को झटका देते हुए एनडीए समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में क्राॅस वोटिंग की थी, जिसकी वजह से इंडिया गठबंधन के प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा। हालांकि कांग्रेस ने अब ऐसे विधायकों पर सख्त रुख अख्तियार कर लिया है, जिन्होंने क्राॅस वोटिंग की है। इतना ही नहीं कांग्रेस ने ओडिशा में तीन विधायकों पर निलंबन की गाज करा दी है। निलंबित किए गए विधायकों में रमेश जेना, दशरथी गोमांगो और सोफिया फिरदौस शामिल हैं।
बताया जा रहा है कि इन तीनों विधायकों ने कांग्रेस और बीजू जनता दल के संयुक्त उम्मीदवार के बजाय भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय के पक्ष में मतदान किया। इस क्रॉस वोटिंग के कारण कांग्रेस-बीजद गठबंधन के उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा, जबकि दिलीप राय चुनाव जीतने में सफल रहे।
यह बोली कांग्रेस
कांग्रेस ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि यह पार्टी अनुशासन का गंभीर उल्लंघन है। पार्टी के अनुसार, तीनों विधायकों ने न केवल व्हिप का उल्लंघन किया, बल्कि पार्टी की विचारधारा और हितों के खिलाफ भी काम किया। इस आधार पर ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने तत्काल प्रभाव से उन्हें निलंबित करने का फैसला लिया।
भविष्य में इन विधायकों के खिलाफ हो सकती है कड़ी कार्रवाई
पार्टी सूत्रों के अनुसार, मामले की विस्तृत समीक्षा की जा रही है और भविष्य में इन विधायकों के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई, यहां तक कि निष्कासन, भी किया जा सकता है। कांग्रेस मीडिया सेल के अध्यक्ष अरबिंद दास ने कहा कि पूरी घटना की जांच जारी है। वहीं, भक्त चरण दास ने भी क्रॉस वोटिंग की पुष्टि करते हुए आश्चर्य जताया। उन्होंने कहा कि पार्टी को ऐसी उम्मीद नहीं थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि निलंबित विधायक अब विधानसभा में कांग्रेस के अन्य विधायकों के साथ नहीं बैठ सकेंगे।
चार सीटों के लिए थे पांच उम्मीदवार
राज्यसभा की चार सीटों के लिए हुए इस चुनाव में कुल पांच उम्मीदवार मैदान में थे। भारतीय जनता पार्टी ने मनमोहन सामल और सुजीत कुमार को उम्मीदवार बनाया था, जबकि बीजद की ओर से संतृप्त मिश्रा मैदान में थे। कांग्रेस-बीजद के संयुक्त उम्मीदवार डॉ. दत्तेश्वर होता थे। चुनाव परिणामों में भाजपा के दोनों उम्मीदवार और बीजद के प्रत्याशी विजयी रहे, जबकि क्रॉस वोटिंग के चलते दिलीप राय को भी जीत मिली। इस घटनाक्रम ने ओडिशा की राजनीति में हलचल मचा दी है और पार्टी अनुशासन को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
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