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माथे पर त्रिपुंड-चन्द्रमा, सिर पर मुकुट : भोले का दिव्य शृंगार देख अभिभूत हुए भक्त, भस्म लेपन के साथ दिया आशीर्वाद

भोले का दिव्य शृंगार देख अभिभूत हुए भक्त, भस्म लेपन के साथ दिया आशीर्वाद
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admin

Mar 18, 202612:09 PM

उज्जैन। उज्जैन में विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकालेश्वर मंदिर में चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि (बुधवार) पर सुबह बाबा महाकाल का दिव्य शृंगार देखने को मिला। बाबा के इस रूप को देखने के लिए भक्तगण रात से कतारबद्ध थे। तड़के 4 बजे आयोजित विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती के दौरान मंदिर प्रांगण श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा। इस अवसर पर पूरा परिसर जय महाकाल के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा और भक्तों के चेहरों पर बाबा के दर्शन की अलौकिक प्रसन्नता स्पष्ट दिखाई दे रही थी।

सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में बाबा का जल से स्नान किया जाता है। इसके बाद भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें बाबा को भस्म चढ़ाई गई और आरती उतारी गई। यह आरती महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा की जाती है। वे मंत्रोच्चार के साथ बाबा महाकाल को भस्म अर्पित करते हैं। इस समय शिवलिंग पर भस्म बिखेरी जाती है, जो निराकार रूप का प्रतीक है।

भस्मारती में निराकार से साकार रूप के होते हैं दर्शन

आरती में बाबा अपने भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। वहीं, भस्म आरती होने के बाद बाबा का जलाभिषेक किया गया, पंचामृत से पूजा हुई, और पवित्र भस्म से उनका विशेष स्नान भी कराया गया।

इसके बाद बाबा का विशेष शृंगार किया गया। इसमें महाकाल को बहुत सुंदर तरीके से सजाया गया। बाबा के माथे पर स्पष्ट त्रिपुंड व माथे पर चंद्रमा सुसज्जित किया गया और नवीन मुकुट पहनाकर बाबा को फूलों की माला पहनाई गई। साथ ही ताजा बिल्वपत्र (बेलपत्र) चढ़ाए गए और रंग-बिरंगे फूलों की मालाओं से पूरे शृंगार को और भी आकर्षक बनाया गया।

भस्मारती का अनुभव होता है अत्यंत अलौकिक

वहीं, श्रृंगार के बाद कपूर से महा-आरती की जाती है, जिसका अनुभव अत्यंत अलौकिक होता है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसे बहुत खास माना जाता है। यह दुनिया का एकमात्र दक्षिणमुखी स्वयंभू शिवलिंग है। मंदिर में प्रवेश करने के लिए हर किसी के लिए नियम सख्त हैं। पुरुषों के लिए धोती (धोती-सोला) और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। आरती के दौरान कैमरा और मोबाइल ले जाना वर्जित है।

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