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भोपाल। मप्र में 25 साल बाद सरकारी नौकरी के लिए 2 बच्चों वाली अनिवार्य शर्त हटने जा रही है। इसको लेकर सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है। जल्द ही प्रस्ताव कैबिनेट में आएगा। उसके बाद मप्र सिविल सेवा नियम 1961 में संशोधन कर जोड़ी गई दो बच्चों की बाध्यता वाली शर्त को हटा दिया जाएगा। हालांकि अभी भी सरकारी कर्मचारियों के लिए 2 बच्चों कीे बाध्यता है, लेकिन ऐसे मामलों की शिकायतों पर अब सरकारी विभागों में कार्रवाई होना लगभग बंद हो चुका है।
मप्र में 26 जनवरी 2001 में सरकारी नौकरी के लिए 2 बच्चों की बाध्यता लागू की थी। इसके बाद शासकीय सेवक के 2 से अधिक जीवित बच्चे होने की स्थिति में कई लोगों की नौकरी भी जा चुकी है। अब सरकार इसमें बदलाव करने जा रही है। इसको लेकर शीर्ष स्तर पर सहमति बन चुकी है। अंतिम निर्णय कैबिनेट से होगा। 2 बच्चों की बाध्यता वाली शर्त हटने के बाद 3 जीवित बच्चे होने पर भी किसी की नौकरी नहीं जाएगी।
सामान्य प्रशासन विभाग के अनुसार शर्त हटने के साथ ही तीसरी संतान से जुड़े जितने भी शासन स्तर या न्यायालयों में लंबित हैं, वे स्वतरू समाप्त हो जाएंगे। बताया गया कि इसके लिए विभाग ने विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया है। हालांकि 2001 के बाद जिन लोगों की नौकरी तीसरी संतान की वजह से जा चुकी है, उन्हें सेवा में वापस लिया जाएगा या नहीं। इसका अंतिम निर्णय कैबिनेट से होगा। हालांकि प्रस्ताव में सेवा वापसी का कोई प्रावधान नहीं है।
9 साल पहले हटा चुका है छत्तीसगढ़
अविभाजित मप्र में दो बच्चों की बाध्यता वाल नियम बन चुका था, ऐसे में 1 नवंबर 2000 को बंटवारे के बाद छत्त्तीसगढ़ में भी दो बच्चों की बाध्यता वाला नियम लागू किया गया था। हालांकि छत्तीसगढ़ ने 9 साल पहले 14 जुलाई 2017 को यह पाबंदी हटा दी थी। अब वहां तीन बच्चों पर भी नौकरी में लोग काम कर रहे हैं। इसी तरह राजस्थान भी 11 मई 2016 को दो बच्चों की बाध्यता वाले नियम को हटा चुका है।
इनका कहना है
इस मामले में सामान्य प्रशासन विभाग ने होमवर्क किया है। अब यह मामला वरिष्ठ स्तर पर प्रक्रिया में है।
अजय कटेसरिया, अपर सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग
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