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केरल में जल्द बजेगी चुनावी रणभेरीः : इलेक्शन की तैयारियों को लेकर ईसी ने की अहम पीसी, सम्मानित हुए first time voter

इलेक्शन की तैयारियों को लेकर ईसी ने की अहम पीसी, सम्मानित हुए first time voter
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admin

Mar 07, 202604:18 PM

तिरुवनंतपुरम। चुनाव आयोग ने केरल विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारियों को लेकर कोच्चि में एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त डॉ. सुकबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले आयोग ने पहली बार वोट देने जा रहे युवाओं और समाज के प्रेरणादायक लोगों को सम्मानित भी किया।

इस मौके पर अमृता, यानल सुलेमान और फेनल सारा जेफरसन जैसे युवा मतदाताओं को सम्मानित किया गया। अमृता सेंट पॉल्स कॉलेज से बीकॉम इन कोऑपरेशन, यानल सुलेमान बीकॉम इन लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट और फेनल सारा जेफरसन बी वोक इन मैनेजमेंट ऑफ पब्लिक सिस्टम्स एंड वेलफेयर की पढ़ाई कर रही हैं। इसके अलावा 96 वर्षीय पीबी विशलम को भी सम्मानित किया गया, जो 1956 में सरकारी दाई के रूप में सेवा शुरू करने के बाद आज भी सक्रिय मतदाता के रूप में लोकतंत्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं। साथ ही दिव्यांग अधिकारों के लिए काम करने वाले राजीव पलारोथी को भी सम्मानित किया गया।

आयोग ने दलों के साथ की बैठक

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि पिछले दो दिनों में आयोग ने केरल की सभी राजनीतिक पार्टियों और राज्य की चुनाव मशीनरी के साथ विस्तृत बैठकें कीं। इसमें मुख्य सचिव, डीजीपी, पुलिस और विभिन्न प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारी भी शामिल रहे। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने युवाओं, स्विप आइकॉन और समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की, ताकि आने वाले चुनाव में ज्यादा से ज्यादा लोग मतदान में हिस्सा लें। उन्होंने बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) और चुनाव अधिकारियों की मेहनत की भी सराहना की, जिन्होंने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया।

केरल में लोकतंत्र की पुरानी परंपरा

ज्ञानेश कुमार ने कहा कि केरल में लोकतंत्र की परंपरा बहुत पुरानी है। यहां एक हजार साल पहले नट्टाकूट्टम जैसी संस्थाएं सामूहिक निर्णय की परंपरा को आगे बढ़ा चुकी हैं। उन्होंने बताया कि 1960 में केरल ने पहला आचार संहिता लागू किया था, जिसे बाद में चुनाव आयोग ने पूरे देश में अपनाया और आज इसे मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट कहा जाता है। इसके अलावा 1982 में परावूर विधानसभा क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का पहला पायलट प्रयोग भी केरल में ही किया गया था।

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