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महाशिवरात्रि पर भक्तों का जोश हाई: : धार्मिक नगरी से लेकर सोमनाथ तक हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजे शिवालय, हरिद्वार में भी दिखा आस्था का अद्भुत नजारा

धार्मिक नगरी से लेकर सोमनाथ तक हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजे शिवालय, हरिद्वार में भी दिखा आस्था का अद्भुत नजारा
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admin

Feb 15, 202601:54 PM

उज्जैन/सोमनाथ। महाशिवरात्रि के पर्व पर रविवार को शिवालय हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठे। शहर से लेकर गांव तक शिवालयों में भक्तों की भीड़ रही। इस दौरान महादेव की आराधना की गई। मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन से लेकर बारह ज्योतिलिंर्गों में पहले स्थान पर विराजमान सोमनाथ ज्योतिर्लिंग में महाशिवरात्रि के दिन आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। पर ऐसा ही दृश्य धर्मनगरी हरिद्वार में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। शहर के प्रमुख शिवालयों में दर्शन और जलाभिषेक के लिए भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा है। विशेष ज्योतिषीय महत्व के कारण इस बार श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक बताई जा रही है।

भक्त सोमनाथ महादेव के दर्शन के लिए घंटों लाइन में खड़े होकर इंतजार कर रहे हैं और साथ ही बाबा के भजन भी गा रहे हैं। महिलाओं के बीच महाशिवरात्रि का अलग ही रंग देखने को मिल रहा है, जो परिसर में महादेव की शादी के बारात गीत गा रही हैं।

महाशिवरात्रि के अवसर पर एक श्रद्धालु ने कहा, "आज मैं महाशिवरात्रि के अवसर पर प्रार्थना करने सोमनाथ आई हूं और यहां की व्यवस्था शानदार है क्योंकि भीड़ होने के बाद भी आराम से दर्शन करने का मौका मिल रहा है। सुबह की मंगला आरती बहुत सुंदर थी और सब कुछ बहुत सुव्यवस्थित है। मेरा मानना है कि सबको एक बार दर्शन के लिए जरूर आना चाहिए।" पीएम मोदी की सराहना करते हुए महिला श्रद्धालु ने कहा, "मंदिर की साफ-सफाई और व्यवस्था को लेकर सरकार की तरफ से बहुत काम किया जा रहा है और प्रदेश में भी तेजी से विकास हो रहा है।"

महाकाल मंदिर में 10 लाख श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद

वहीं महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर उज्जैन में बाबा महाकाल का विशेष भस्मारती समारोह संपन्न हुआ। इस अवसर पर मंदिर के पट रात 2.30 बजे से खोले गए, जो 44 घंटे तक लगातार खुले रहेंगे। महाशिवरात्रि पर मंदिर में लगभग 10 लाख श्रद्धालुओं के दर्शन की उम्मीद है। देशभर में शिवरात्रि की धूम है, लेकिन उज्जैन में इसका विशेष महत्व है। यहां भस्मारती, विशेष श्रृंगार और शिव नवरात्रि जैसे आयोजन होते हैं। इस अवसर पर सेहरे का प्रसाद भी बांटा जाता है, जिसे लोग बहुत शुभ मानते हैं।

पंचामृत अभिषेक और भस्मारती

महाशिवरात्रि के मौके पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह 2.30 बजे बाबा महाकाल का विशेष पंचामृत अभिषेक किया गया और भस्मारती की गई। देश के कोने-कोने से श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचे। मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर बाबा महाकाल के दर्शन का विशेष महत्व है। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।

भस्मारती से पहले बाबा महाकाल का पंचामृत अभिषेक हुआ। पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और खांडसारी शक्कर शामिल थे। इसके बाद बाबा को चंदन का लेप लगाया गया और सुगंधित द्रव्य अर्पित किए गए। बाबा को उनकी प्रिय विजया (भांग) से श्रृंगारित किया गया और श्वेत वस्त्र पहनाए गए। झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के बीच भस्मारती संपन्न हुई, जिसे देखकर भक्त भाव-विभोर हो गए।

सेहरा सजावट और भस्मारती

शिवरात्रि के अगले दिन बाबा का सेहरा सजाया जाता है और दोपहर में भस्म आरती की जाती है। यह साल में केवल एक बार होता है। बाबा के सेहरे को प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। लोग इसे बहुत शुभ मानते हैं और सेहरे के फूल-पत्तियों को संभालकर रखते हैं। मान्यता है कि इससे घर में सुख-शांति और धन-धान्य की वृद्धि होती है।

मंदिर में दिनभर की पूजा-अर्चना

भस्मारती उपरांत दद्योदक आरती और भोग आरती के बाद दोपहर 12 बजे उज्जैन तहसील की ओर से पूजन-अभिषेक संपन्न हुआ। शाम 4 बजे होल्कर और सिंधिया स्टेट की ओर से पूजन और सायं पंचामृत पूजन के बाद भगवान महाकालेश्वर की नित्य संध्या आरती हुई। रात्रि में 8 बजे से 10 बजे तक कोटितीर्थ कुण्ड के तट पर विराजित श्री कोटेश्वर महादेव का पूजन, सप्तधान्य अर्पण और पुष्प मुकुट श्रृंगार (सेहरा) के बाद आरती की गई। रात्रि 10.30 बजे से सम्पूर्ण रात्रि भगवान महाकालेश्वर का महाअभिषेक संपन्न हुआ। इसमें 11 ब्राह्मणों द्वारा रूद्रपाठ और विभिन्न मंत्रों के माध्यम से अभिषेक किया गया।

भस्म लेपन, पंचामृत पूजन और पांच प्रकार के फलों से अभिषेक के बाद, भगवान को नवीन वस्त्र पहनाए गए और सप्तधान्य अर्पित किया गया। भगवान महाकालेश्वर को चंद्र मुकुट, छत्र, त्रिपुंड और अन्य आभूषणों से श्रृंगारित किया गया। सेहरा आरती के दौरान भगवान को विभिन्न मिष्ठान्न, फल और पंच मेवा का भोग अर्पित किया गया। 16 फरवरी 2026 को सुबह सेहरा दर्शन के उपरांत दिन में 12 बजे भस्मारती संपन्न होगी। इसके बाद भोग आरती होगी और शिवनवरात्रि का पारणा किया जाएगा।

हरिद्वार के दक्षेश्वर महादेव मंदिर के बाहर लगी लंबी कतारें

वहीं हरिद्वार के दक्षेश्वर महादेव मंदिर के बाहर सुबह से ही लंबी कतारें लगी हुई हैं। प्रशासन द्वारा व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात है तथा भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। प्रात:कालीन मुहूर्त से ही श्रद्धालु गंगाजल और पूजन सामग्री के साथ अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं और पूरा मंदिर परिसर ह्लबोल बमह्व और हर-हर महादेव के जयघोष से निरंतर गूंज रहा है।

दक्षेश्वर महादेव मंदिर पुजारी महंत रविंद्र पुरी ने कहा, "महाशिवरात्रि के अवसर पर उत्तराखंड और पूरे देश के सभी श्रद्धालुओं और नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएं। फाल्गुन महीने में मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि, दिवाली, होली और कालाष्टमी के साथ वर्ष की चार प्रमुख रातों में से एक है। आस्था की दृष्टि से दक्षेश्वर महादेव मंदिर की बहुत मान्यता है क्योंकि ये भगवान शिव की ससुराल है और मां सति का जन्मस्थान भी। 300 वर्षों बाद ऐसा शुभ-संयोग महाशिवरात्रि पर बना है, जिसमें कुंभ राशि में 5 ग्रह एक साथ आ रहे हैं और ऐसे में जो भी लोग भगवान शिव की मानसिक और शारीरिक रूप से पूजा करेंगे, उनकी हर मनोकामना पूरी होगी।"

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