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चेन्नई। तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवी ने मंगलवार को विधानसभा का साल का पहला सत्र शुरू होने से पहले परंपरागत उद्घाटन भाषण नहीं दिया। इतना ही नहीं, वे गुस्से में कक्ष छोड़कर सदन से बाहर चले गए। विवाद का कारण कारण राष्ट्रीय गान के प्रति सम्मान की कमी बताया जा रहा है। गवर्नर के इस कदम से एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है और पिछले साल के शुरुआती सेशन के दौरान सामने आए प्रोटोकॉल विवाद को फिर से हवा मिल गई।
विधानसभा की बैठक सुबह 9.30 बजे शुरू हुई, जो लंबे समय से चली आ रही परंपरा के मुताबिक थी कि राज्यपाल साल के पहले सत्र की शुरुआत में सदन को संबोधित करते हैं। विधानसभा चुनाव सिर्फ तीन महीने दूर हैं, इस वजह से इस कार्यवाही का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया। हालांकि, सत्र में तब अचानक मोड़ आया, जब कार्यवाही शुरू होने पर राष्ट्रगान के बजाय तमिल प्रार्थना गाए जाने के बाद राज्यपाल सदन से बाहर चले गए।
भाषण में थे कुछ गलत औ असत्य तथ्य
राज्यपाल ने कहा कि डीएमके सरकार द्वारा तैयार किए गए भाषण में कुछ असत्य और गलत तथ्य थे। उनके माइक को बार-बार बंद किया गया और उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी गई। राज्यपाल ने कहा मैं बेहद निराश हूं। राष्ट्रीय गान का उचित सम्मान नहीं किया गया। मेरा भाषण बार-बार रोका गया, यह दुर्भाग्यपूर्ण है। विधानसभा के अंदर स्थिति तनावपूर्ण हो गई और सभापति एम. अप्पावु ने राज्यपाल से अनुरोध किया कि वे विधानसभा के नियमों और प्रथाओं का पालन करें।
लगातार दूसरे साल विधानसभा से बाहर गए राज्यपाल
यह लगातार दूसरा साल है, जब राज्यपाल रवि इसी मुद्दे पर विधानसभा से बाहर चले गए हैं। 2025 में भी उन्होंने यह कहते हुए कि सेशन की शुरुआत में राष्ट्रगान गाया जाना चाहिए, इसी तरह सदन छोड़ दिया था। एक छोटी तमिल शुभकामना देने के बाद गवर्नर ने मंगलवार को पारंपरिक भाषण दिए बिना ही सदन छोड़ दिया।
यह बोले स्पीकर
स्पीकर एम. अप्पावु ने बाद में सदन को बताया कि यह मामला पहले ही सुलझ चुका है। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले साल गवर्नर ने उन्हें राष्ट्रगान के बारे में लिखा था और एक औपचारिक जवाब भेजा गया था। अप्पावु ने कहा कि पूर्व स्पीकर दुरई मुरुगन ने भी विधानसभा की परंपराओं के बारे में विस्तार से बताया था और कहा कि इस मामले को सुलझा हुआ माना गया है और सदन स्थापित विधायी प्रथाओं के अनुसार काम करता रहेगा।
सीएम स्टालिन ने राज्यपाल पर लगाया शिष्टाचार के उल्लंघन का आरोप
मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने राज्यपाल पर आरोप लगाया कि उन्होंने परंपरा और शिष्टाचार का उल्लंघन करते हुए कक्ष छोड़ा। उन्होंने आगे कहा कि सरकार द्वारा तैयार किए गए भाषण में राज्यपाल को अपनी राय जोड़ने या अलग कुछ कहने की कोई जगह नहीं थी। स्टालिन ने यह भी कहा कि राज्यपाल ने यह कदम जानबूझकर उठाया और इसका मतलब विधानसभा की अवमानना है। मुख्यमंत्री ने यह दोहराया कि डीएमके का मानना है कि राज्यपाल की आवश्यकता नहीं है, हालांकि उनके पूर्व मुख्यमंत्री सीएन अन्नादुरई और एम करुणानिधि ने इस पद का सम्मान किया था और वर्तमान सरकार उसी परंपरा का पालन करती है।
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