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भोपाल-जबलपुर। यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट ने मप्र सरकार से कार्ययोजना मांगी है। एक गैर-सरकारी संगठन की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया है। जिसके बाद फैक्ट्री के आसपास के दूषित मिट्टी और भूजल के ऑकलन और ठीक करने संबंधी कार्ययोजना का ब्योरा 23 मार्च तक मांगा गया है।
याचिका में यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास के दूषित मिट्टी और भूजल के उपचार और समयबद्ध कार्रवाई की मांग की गई थी। जिसकी सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह और अजय कुमार निरंकारी की पीठ ने यह निर्देश दिये गये हैं। इसके पहले मामले में जबाव के लिये कुछ समय मांगते हुए राज्य सरकार की तरफ से पेश किये गये शपथपत्र में बताया गया कि दूषित मिट्टी और भूजल के आंकलन और आसपास के क्षेत्र की सफाई के लिए टेंडर सहित उपचार योजना पर काम चल रहा है। यह गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग के उप सचिव कृष्णकांत दुबे की ओर से प्रस्तुत किया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने अगली सुनवाई के लिये 23 मार्च का समय तय कर दिया है।
जल चुका है बंद हो चुकी फैक्ट्री का कचरा
महत्वपूर्ण है कि बंद हो चुकी यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से निकला 337 टन जहरीला कचरा एक जनवरी, 2025 को भोपाल से पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थानांतरित किया गया और जून 2025 के अंत तक एक निजी अपशिष्ट उपचार संयंत्र में पूरी तरह से जला दिया गया। बावजूद इसके फैक्ट्री स्थल की दूषित मिट्टी और उससे कुछ मीटर की दूरी पर स्थित तीन तालाब की शुद्धता को लेकर गैस पीड़ित संगठन मोर्चा खोले हुए हैं।
सरकार ने कोर्ट को यह बताया
-शपथपत्र में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि राज्य सरकार ने 87.74 एकड़ भूमि (यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री स्थल) का उपयोग स्मारक की स्थापना सहित अन्य उद्देश्यों के लिए करने का निर्णय लिया है। इसके लिए एक विस्तृत कार्य योजना तैयार की जाएगी।
-निगरानी समिति ने मिट्टी और भूजल प्रदूषण, साथ ही पारे के रिसाव और भूजल में जमा हुए कचरे की मात्रा निर्धारित करने के लिए नए अध्ययन का सुझाव दिया है। राज्य सरकार ने इसके लिए एजेंसी की पहचान और अंतिम रूप देने सहित कार्य योजना बताई है।
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