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भोपाल। मिडिल ईस्ट में बीते 15 दिनों से जारी भीषण युद्ध के की वजह से मध्यप्रदेश के कई जिलों में घरेलू गैस की किल्लत ने आम जनता को संकट में डाल दिया है। जिस जिले में देखो वहीं गैस गोडाउनों के बाहर उपभोक्ताओं की लंबी-लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं। राजधानी भोपाल, रायसेन, छिंदवाड़ा और ग्वालियर समेत कई जिलों में गैस के लिए लंबी कतारें लग रही हैं। इतना ही नहीं गैस की किल्लत ने आम आदमी ही नहीं, होटल कारोबार और स्वास्थ्य सेवाओं को भी परेशानी में डाल दिया है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि कई जगहों पर होटल-ढाबों में चूल्हों, लकड़ी और कोयले का सहारा लेना पड़ रहा है।
भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी ) में गैस संकट का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ सकता है। यहां 16 हॉस्टलों की मेस और मरीजों के लिए संचालित सेंट्रल किचन में गैस का स्टॉक केवल दो दिन का बचा है। बताया जा रहा है कि नए सिलेंडर की बुकिंग पर करीब 25 दिन की वेटिंग मिल रही है। इस स्थिति को देखते हुए रेजिडेंट डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सप्लाई बहाल नहीं हुई तो उन्हें भूखे पेट ड्यूटी करनी पड़ सकती है। दूसरी ओर, शहर के दशहरा मैदान स्थित गैस गोदामों पर सुबह से ही सैकड़ों लोग लाइन में खड़े नजर आ रहे हैं।
रायसेन में गैस न मिलने का गुस्सा सड़कों पर उतरा
रायसेन जिले में गैस न मिलने से लोगों का गुस्सा सड़कों पर उतर आया। शुक्रवार सुबह सागर रोड पर बड़ी संख्या में महिलाओं और स्थानीय लोगों ने चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे सुबह पांच बजे से गैस के लिए लाइन में लगे थे, लेकिन कई घंटे इंतजार के बाद भी सिलेंडर नहीं मिला। महिलाओं ने बताया कि गैस न मिलने से घरों में न सुबह की चाय बन पाई और न बच्चों के लिए खाना तैयार हो सका। सूचना मिलने पर प्रशासन मौके पर पहुंचा और किसी तरह स्थिति को शांत कराया।
छिंदवाड़ा-ग्वालियर में चूल्हों में तैयार हो रहा नाश्ता
छिंदवाड़ा में भी गैस संकट के कारण मशहूर इंडियन कॉफी हाउस में पारंपरिक चूल्हों पर नाश्ता तैयार किया जा रहा है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस की मौजूदगी में सिलेंडर वितरण किया जा रहा है। वहीं ग्वालियर में शादी सीजन के बीच कैटरर्स को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई कैटरर्स अब डीजल भट्ठियों, लकड़ी और कोयले का उपयोग कर खाना बना रहे हैं। बाजार में इंडक्शन चूल्हों और कोयले की मांग लगभग 20 प्रतिशत तक बढ़ गई है।
प्रशासन का कहना है कि प्रदेश में गैस का स्टॉक पर्याप्त है, लेकिन ट्रकों के देर से पहुंचने और सर्वर समस्या के कारण सप्लाई प्रभावित हुई है। हालांकि जमीनी स्तर पर लोगों की लंबी कतारें और बढ़ती परेशानी कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है।
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