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भोपाल। मध्यप्रदेश में हर साल 411 वर्ग किमी जंगल कम हो रहा है। पिछले 45 सालों में राज्य के कुल वन रकबे में से अभी तक 23 प्रतिशत वनभूमि घट गई है। वन भूमि घटने की मुख्य वजह विकास परियोजनाएं हैं। आवंटित भूमियों के इतर यह वनाधिकार की भूमि भी शामिल है। इसके अलावा अतिक्रमण के नाम पर वन भूमि कम हुई है। जानकार जंगल या वन भूमि में लगातार हो रही कमी को आपदाओं को बुलावा मान रहे हैं।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार पिछले 45 साल में विकास के नाम पर सालाना 76.78 वर्ग किलोमीटर और वनाधिकार के नाम पर 212.87 वर्ग किलोमीटर आवंटित की गयी है। इसके अलावा वन भूमि में 121.35 वर्ग किलोमीटर सालाना अतिक्रमण हुआ है। इस तरह कुल 411 वर्ग किलोमीटर सालाना कम हो रही है। बात साफ है कि हरियाली घटी है। अगर वन घटने की रफ्तार यही रही तो मौसमी और पर्यावरणीय दशाओं में विसंगतियां पैदा हो सकती है।
जंगलों के घटने की बड़ी वजह यह
वर्तमान आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के कुल क्षेत्रफल का 25 प्रतिशत हिस्सा वन अच्छादित है। इसमें से वन क्षेत्र में गिरावट चिंता का विषय इसलिये भी माना जा रहा है कि सालाना घट रही 411 वर्ग किलोमीटर वन भूमि में से 19.40 प्रतिशत हिस्सेदारी वनाधिकार पट्टे और समय-समय पर हुए अतिक्रमणों की रही है। दूसरी तरफ सड़क, नहर, विद्युत और रेल लाइनों जैसे विकास कार्यों के लिये सरकार की तरफ से 1981 से लेकर 2025 के बीच 4.45 प्रतिशत वन भूमि परिवर्तित की गई है।
संशोधनों ने भूमि उपयोग में बदलाव की प्रक्रिया बनाई सरल
सामाजिक सरोकार से जुड़ी परियोजनाओं को जल्दी अनुमति को देने के लिये वन संरक्षण संवर्धन अधिनियम1980 में हुए संशोधनों की वजह से भूमि के उद्देश्य या किसी खास उपयोग के लिए प्रदान करने की प्रकिया सरल कर दी गई। इसके बाद 0.4 वर्ग किमी भूमि के फैसले राज्य स्तर पर बनाई गई केंद्रीय कमेटी और 0.05 वर्ग किमी वन भूमि व्यपर्तन के अधिकार दिये गये। यह संशोधन पहले 10 अक्टूबर 2014 और 2023 में हुए हैं।
विकास की भेंट चढ़ी 3455.24 वर्ग किमी भूमि
2016 से 30 नवंबर 2025 के बीच 571 परियोजनाओं में 407.77 वर्ग किमी की राज्य स्तर पर जमीन पेयजल, विद्युत स्टेशन के साथ सड़क और पुलिया के लिये दे दी गई। वहीं 25 अक्टूबर 1980 से 30 नवंबर 2025 के बीच केंद्रीय समिति द्वारा 3047.46 वर्ग किमी प्रदान की गई है।
जंगल की अभी तक 174.96 वर्ग किलोमीटर ही मुक्त करायी
भारत सरकार के एक आंकड़े के अनुसार 31 मार्च 2024 की अवधि में प्रदेश की 5460.89 वर्ग किमी भूमि में अतिकमण हुआ है। जिसमें सिर्फ 174.96 वर्ग किमी जंगल ही मुक्त कराया जा सका है। जानकारों के अनुसार वनाधिकार पट्टे भी जंगलों के लिये चुनौती बने है। 2006 से लेकर 31 अक्टूबर 2023 की अवधि में वनाधिकार के तहत 9579.24 वर्ग किमी भूमि प्रदान की गई। इसमें व्यक्तिगत 3656.46 और सामुदायिक भूमि 5923.03 वर्ग किमी है।
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