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कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है : कवि सम्मेलन में कुमार विश्वास ने श्रोताओं को किया भावविभोर, मोहन की तारीफ में पढ़े कसीदे

कवि सम्मेलन में कुमार विश्वास ने श्रोताओं को किया भावविभोर, मोहन की तारीफ में पढ़े कसीदे
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admin

Mar 19, 202601:02 PM

भोपाल। दुनिया के जाने माने कवि डॉ कुमार विश्वास ने नवसंवतसर के शुभारंभ की पूर्व संध्या पर राजधानी भोपाल में आयोजित कवि सम्मेलन में शामिल हुए। देर रात तक चले इस समारोह के माध्यम से हास्य, प्रेम की कविताओं के साथ लोगों ने नवसंवतसर का स्वागत किया। खास बात यह रही की डाॅ. कुमार ने भी अपनी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। उन्होंने जैसे ही कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है... लाइने पढ़ी, अटल पथ पर मौजूद श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। इतना ही वे खुद भी गुनगनाने लगे।

इसके पहले भव्य आतिशबाजी ने राजधानी के आसमान को बनाया रंगीन बना दिया। कविता, संस्कृति और भावनाओं के इस जीवंत उत्सव में कवि डॉ. कुमार विश्वास संयोजक की भूमिका में थे। बावजूद इसके उन्होंने भारतीय संस्कृति के शाश्वत मूल्यों का सम्मान करते हुए अपनी भावपूर्ण कविताएं सुनाईं। भगवान राम और भगवान कृष्ण का स्मरण करते हुए दर्शकों के दिलों में आध्यात्मिक तार छेडने से नहीं चूके। उनके साथ हास्य कवि दिनेश बावरा, पैरोडीकार कवि सुदीप भोला, अजय अंजाम, कुशल कुशलेन्द्र कवियत्री सान्या राय ने मंच साझा किया। हँसी और चिंतन के संदेशों के बीच उत्साही दर्शकों के बीच युवा छात्रों से लेकर बुजुर्ग प्रशंसक तक शामिल थे। जिन्होंने जोरदार तालियों, हँसी और कभी- कभी मौन श्रद्धा के पलों के

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके बाद उन्होंने अतिथि कवियों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। अवसर पर कर्मश्री संस्था के अध्यक्ष विधायक रामेश्वर शर्मा, भगवान दास सबनानी, प्रदेश महामंत्री मोहन कोठारी, मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल, महापौर मालती राय, भाजपा जिलाध्यक्ष रविंद्र यती के साथ चेंबर ऑफ कामर्स के अध्यक्ष गोविंद गोयल प्रमुख रूप से मौजूद थे।

हिन्दू नहीं भारतीय नववर्ष कहिये: विश्वास

कवि समेलन के शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए डॉ कुमार विश्वास सारंग ने कहा कि हिन्दू नववर्ष नहीं इसे भारतीय नववर्ष कहिये। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि जिस राजा के मन में धर्म रहता है वहां सस्कृति पल्लवित होती है। भारत की प्राचीनतम सोच के साथ वह जितनी मेहनत कर रहे हैं ऐसा लगता पिछले 30 वर्षों में उतनी मेहनत नहीं हुई है।

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कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है : कवि सम्मेलन में कुमार विश्वास ने श्रोताओं को किया भावविभोर, मोहन की तारीफ में पढ़े कसीदे