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नई दिल्ली। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज भारत दौरे पर है। जर्मनी का चांसलर बनने के बाद मर्ज की यह पहली एशिया यात्रा है, जिसका मकसद व्यापार, निवेश, रक्षा और महत्वपूर्ण तकनीकों में सहयोग बढ़ाना है। वे सोमवार को गुजरात के अहमदाबाद पहुंचे हैं। जहां मर्ज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों की मुलाकात साबरमती पर हुई। इसके बाद पीएम मोदी और और जर्मनी के चांसलर मर्ज एक ही कार से साबरमती रिवरफ्रंट के लिए रवाना हो गए। यहां पर पहुंचने पर पर अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव का उद्घाटन किया। इसके साथ ही द्विपक्षीय वार्ता भी होनी है।
पीएम मोदी सुबह-सुबह साबरमती आश्रम पहुंचे, जहां उन्होंने पुनर्विकास परियोजना की समीक्षा के बाद जर्मन चांसलर की अगवानी किया। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति की गिरफ्तारी के लिए दिखाई गई सैन्य ताकत के बीच यह मुलाकात काफी अहम है। दोनों नेता यूक्रेन में शांति बहाली और वैश्विक चुनौतियों पर भी चर्चा करेंगे। जर्मनी भारत का यूरोपीय संघ में सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है और इस यात्रा के दौरान पनडुब्बी सौदे जैसी बड़ी रक्षा परियोजनाओं पर अंतिम मुहर लग सकती है।
रक्षा सौदा और आर्थिक संबंधों पर जोर
जर्मन चांसलर की इस यात्रा का एक मुख्य आकर्षण 5 बिलियन यूरो का पनडुब्बी सौदा हो सकता है। जर्मन कंपनी थिसेनक्रुप और मझगांव डॉक के बीच भारतीय नौसेना के लिए छह स्टील्थ पनडुब्बियों की आपूर्ति को लेकर बातचीत चल रही है। इसे मेक इन इंडिया की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ के बीच, भारत अब यूरोप और विशेषकर जर्मनी के साथ अपने आर्थिक संबंधों को और गहरा करना चाहता है।
ग्रीन हाइड्रोजन और तकनीकी सहयोग
भारत और जर्मनी के बीच संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश इंडो-जर्मन ग्रीन हाइड्रोजन रोडमैप पर काम कर रहे हैं। 2024-25 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 51.23 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। चांसलर की इस यात्रा के कुछ ही दिनों बाद यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता भी भारत आएंगे, जहां बहुप्रतीक्षित भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते की घोषणा होने की संभावना है।
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