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राज्यसभा सांसदों का विदाई समारोह बना यादगार : खरगे के चुटीले बयान से सदन में लगे जमकर ठहाके, निशाने पर रहे देवगौड़ा-अठावले

खरगे के चुटीले बयान से सदन में लगे जमकर ठहाके, निशाने पर रहे देवगौड़ा-अठावले
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admin

Mar 18, 202603:51 PM

नई दिल्ली। राज्यसभा में विदाई समारोह के दौरान एक हल्का-फुल्का लेकिन यादगार माहौल देखने को मिला, जब विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने खास अंदाज में चुटीले बयान देकर पूरे सदन को हंसी से भर दिया। उनके भाषण में राजनीतिक तंज, हास्य और भावनाओं का अनोखा मिश्रण देखने को मिला।

खरगे ने पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा का जिक्र करते हुए मजाकिया अंदाज में कहा कि वह उन्हें पिछले 54 वर्षों से जानते हैं और लंबे समय तक साथ काम किया। लेकिन फिर उन्होंने हल्के व्यंग्य में कहा, “मोहब्बत हमसे की, लेकिन शादी नरेंद्र मोदी जी के साथ कर ली।” इस टिप्पणी पर सदन में जोरदार ठहाके लगे और खुद प्रधानमंत्री मोदी भी मुस्कुराते नजर आए।

आठवले की कविताओं पर ली चुटकी

यही नहीं, खरगे ने केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले पर भी चुटकी ली। उन्होंने हंसते हुए कहा कि अठावले की कविताओं में हमेशा प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ ही सुनाई देती है, मानो उन्हें उसी विषय पर सबसे ज्यादा महारत हासिल हो। इस टिप्पणी ने भी सदन का माहौल और खुशनुमा बना दिया।

सच्चे प्रतिनिधि निभाते रहते हैं जिम्मेदारी

हालांकि इस हास्य के बीच खरगे ने एक गंभीर संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि राजनीति और सार्वजनिक जीवन में कभी वास्तविक “सेवानिवृत्ति” नहीं होती। जनसेवा का भाव पद और कार्यकाल से कहीं ऊपर होता है, और सच्चे जनप्रतिनिधि हमेशा देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते रहते हैं।

सेवानिवृत्त हो रहे सांसदों को दी शुभकामनाएं

अपने संबोधन में खरगे ने अप्रैल से जुलाई के बीच सेवानिवृत्त हो रहे सांसदों को शुभकामनाएं भी दीं। उल्लेखनीय है कि वे स्वयं भी जून में राज्यसभा से सेवानिवृत्त होने वाले हैं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि राज्यसभा में बिताया गया समय उनके लिए बेहद सीखने वाला और संतोषजनक रहा।

पवार के पुनः सदन आने पर जताई खुशी

इसके अलावा, उन्होंने शरद पवार के पुनः सदन में आने पर खुशी जताई और दिग्विजय सिंह, के.टी.एस. तुलसी तथा अभिषेक मनु सिंघवी के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने संसदीय बहसों को समृद्ध किया है और उनकी भूमिका हमेशा याद रखी जाएगी।कुल मिलाकर, यह विदाई सत्र हंसी, सम्मान और प्रेरणा से भरा रहा, जिसने संसद की गरिमा के साथ-साथ मानवीय पहलुओं को भी उजागर किया।

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