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470 दिनों में पेश नहीं हो सका सौरभ शर्मा का आरोप-पत्र : परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक की बेनामी संपत्तियों की गणना में उलझी लोकायुक्त टीम!

परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक की बेनामी संपत्तियों की गणना में उलझी लोकायुक्त टीम!
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admin

Apr 02, 202601:55 PM

भोपाल। राजधानी भोपाल में परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के ठिकानों पर लोकायुक्त और आयकर के छापों को 470 दिन पूरे हो चुके हैं। लोकायुक्त द्वारा दर्ज प्रकरण में सौरभ और उसके दोनों साथियों चेतन गौर और शरद जायसवाल को जमानत भी मिल चुकी है। लेकिन अब तक लोकायुक्त पुलिस इस प्रकरण में न्यायालय में आरोप पत्र (चालान) पेश नहीं कर सकी है। लोकायुक्त टीम अब भी प्रकरण में अन्वेषण अर्थात सौरभ की बेनामी संपत्ति की गणना में अब भी उलझी है। विभागीय अधिकारी भी यह बताने की स्थिति में नहीं हैं कि इस प्रकरण की जांच कब तक हो सकेगी और कब तक न्यायालय में आरोप-पत्र पेश किया जा सकेगा।

चालान में देरी से सवा चार महीने में मिली जमानत

लोकायुक्त टीम ने 18 दिसम्बर 2024 को सौरभ शर्मा के अरेरा कॉलोनी स्थित तीन ठिकानों पर छापे मारे थे। इनमें सौरभ का निवास, जयपुरिया स्कूल कार्यालय और चेतन के नाम पर खरीदे एक अन्य मकान पर एक साथ कार्रवाई हुई। लोकायुक्त की कार्रवाई के बीच से निकलकर मेंडोरी के जंगल में पहुंची चेतन गौर के नाम की से इसी दिन देर रात में आयकर टीम ने 52 किलो सोने की ईंट और 11 करोड़ नकदी बरामद की थी।लोकायुक्त टीम ने तीनों ठिकानों से 235 किलो चांदी के अलावा सोने-चांदी के गहने, नकदी और संपत्तियों के दस्तावेज सहित कुल लगभग 8 करोड़ रुपये की संपत्ति की जब्ती दिखाई।

सवा महीने बाद सौरभ के न्यायालय में हाजिर होने और अगले दिन नाटकीय गिरफ्तारी के बाद शरद और चेतन भी लोकायुक्त कार्यालय पहुंच गए। लोकायुक्त ने कार्रवाई के बाद मिले दस्तावेजों में मिली सभी अचल संपत्तियों के राज लोकायुक्त टीम ने अब तक नहीं खोले हैं। हालांकि कुछ संपत्तियों को परिजनों, रिस्तेदारों और चेतन,शरद सहित कंपनियों के नाम पर बताया गया है। चूंकि प्रकरण में 60 दिन से अधिक समय तक चालान पेश नहीं किया गया, इस कारण न्यायालय ने आरोपियों को लाभ देते हुए 1 अप्रैल 2025 को तीनों को जमानत दे दी। हालांकि प्रवर्तन निदेशालय द्वारा धनशोधन निवारण अधिनियम में दर्ज प्रकरण के चलते तीनों ही जेल से बाहर नहीं आ सके हैं।

उच्च न्यायालय ने भी खारिज की जमानत

प्रवर्तन निदेशालय द्वारा प्रकरण में सौरभ, चेतन और शरद की जमानत के लिए उनके परिजन लगातार प्रयास कर रहे हैं। जाने-माने वकीलों के माध्यम से प्रयास किए गए हैं। लेकिन भोपाल विशेष न्यायालय के बाद मप्र उच्च न्यायालय भी तीनों आरोपियों की जमानत निरस्त कर चुका है। सौरभ के अलावा शरद जायसवाल के परिजनर लगातार उसकी जमानत के प्रयास में हैं। हालांकि चेतन गौर को नवजात बच्चों की देखभाल के लिए संवेदनाओं के आधार पर उच्च न्यायालय ने 14 अगस्त 2025 को 15 दिन की अस्थायी जमानत (पैरोल) दी थी। न्यायालय 15 दिनों के लिए पैरोल को आगे भी बढ़ाया था।शरद जायसवाल के परिजन भी लगातार जमानत के लिए प्रयास कर रहे हैं। मामले को संगठित आर्थिक अपराध का बताते हुए उच्च न्यायालय तीन दिन पहले शरद की जमानत खारिज कर चुका है।

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