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इंदौर। आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त भोपाल जेल में बंद अब्दुल करीम बेकरीवाला को भोपाल पुलिस ने जेल से लाकर एक दिन के लिए इंदौर पुलिस के हवाले किया है। जहां से वह अपनी बेटी की शादी में शामिल हुआ इस दौरान पुलिस के साये में निकाह हुआ। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस घेरे के बीच वह पूरे समय रहा।
एनआईए ने वर्ष 2022 में पूरे देश में कार्रवाई करते हुए करीब 100 पीएफआई के एजेंटों को पकड़ा था इंदौर में अब्दुल करीम बेकरीवाला निवासी अहिल्या पल्टन को उठाया गया था। वह आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त था। वह युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रेरित करता था। गिर तारी के बाद उससे लंबी पूछताछ चली और वह तब से ही भोपाल सेंट्रल जेल में बंद है।
हाईकोर्ट में पेरोल की लगाई थी गुहार
बता दें कि सोमवार को उसकी बेटी की शादी थी इसके लिए उसने जबलपुर न्यायालय में याचिका दायर कर एक दिन की पैरोल दिए जाने की गुहार लगाई थी। जहां न्यायालय से उसे बेटी की शादी में सम्मिलित होने की अनुमति मिल गई। जिसके बाद भोपाल सेंट्रल जेल से उसे शादी में शामिल होने के लिए भोपाल पुलिस इंदौर लेकर पहुंची। उसे सदरबाजार पुलिस के सुपुर्द कर भोपाल के पुलिसकर्मी लौट गए। इसके बाद कड़े पहरे के बीच वह बेटी के निकाह में शामिल हुआ।
करीम के घर के बाहर थे सुरक्षा के कड़े इंतजाम
सदरबाजार पुलिस ने अब्दुल करीम बेकरीवाला के घर के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे और पुलिसकर्मी उस पर लगातार निगाह रख रहे थे। सदरबाजार थाना प्रभारी यशवंत बड़ोले का कहना है कि अब्दुल करीम को शादी में शामिल होने के लिए एक दिन का पैरोल मिला है वह बेटी की शादी में शामिल हुआ। इस दौरान पुलिस तैनात की गई थी। मंगलवार को उसे दोबारा भोपाल पुलिस के हैंडओवर कर दिया जाएगा जहां से उसे भोपाल सेंट्रल जेल भेजा जाएगा।
पीएफआई का प्रदेश अध्यक्ष है करीब
पिछले चार सालों से सलाखों के पीछे बंद अब्दुल करीम बेकरीवाला पीएफआई का प्रदेश अध्यक्ष है। उसके साथ एनआईए की टीम ने पीएफआई इंदौर के अध्यक्ष मुमताज कुरैशी,पीएफआई के कोषाध्यक्ष मोह मद जावेद बेलिम और सक्रिय सदस्य शामिल शेख को भी गिर तार किया था।
देश के 23 राज्यों में सक्रिय था संगठन
पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी पीएफआई का गठन 17 फरवरी 2007 को हुआ था। ये संगठन दक्षिण भारत में तीन मुस्लिम संगठनों का विलय करके बना था। इनमें केरल का नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट, कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी और तमिलनाडु का मनिथा नीति पसराई शामिल थे। हालांकि एनआईए ने कार्रवाई करते हुए संगठन को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया था।
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