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हिन्दू धर्म में शीतला अष्टमी का विशेष महत्व : सच्चे मन और श्रद्धा भक्ति करने पर बनी रहती है मां की कृपा, बचें इस तरह की गलतियों से

सच्चे मन और श्रद्धा भक्ति करने पर बनी रहती है मां की कृपा, बचें इस तरह की गलतियों से
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admin

Mar 10, 202604:27 PM

चैत्र माह में मनाया जाने वाला शीतला अष्टमी का पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस दिन माता शीतला की पूजा-अर्चना की जाती है और उनसे परिवार के सदस्यों को रोगों और बीमारियों से सुरक्षित रखने की प्रार्थना की जाती है। मान्यता है कि मौसम परिवर्तन के समय कई तरह की संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए शीतला माता की पूजा कर स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। इस वर्ष शीतला अष्टमी का पर्व 11 मार्च, बुधवार को मनाया जाएगा।

शीतला अष्टमी से एक दिन पहले शीतला सप्तमी मनाई जाती है। इस दिन घरों में विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाए जाते हैं, जिनमें दाल-भात, पूरी, दही, लस्सी और हरी सब्जियां शामिल होती हैं। परंपरा के अनुसार इन सभी व्यंजनों को अगले दिन ठंडा और बासी रूप में खाया जाता है। शीतला अष्टमी के दिन इन्हीं पकवानों का भोग माता शीतला को अर्पित किया जाता है, जिसके बाद परिवार के सदस्य प्रसाद के रूप में उसे ग्रहण करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शीतला अष्टमी के दिन घर में चूल्हा या गैस नहीं जलाना चाहिए। इसलिए जो भी भोजन बनाना होता है, वह एक दिन पहले ही तैयार कर लिया जाता है। इस दिन ठंडा और बासी भोजन करने की परंपरा है, जिसे शरीर के लिए ठंडक देने वाला माना जाता है।

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है। इसके बाद शीतला माता के मंदिर जाकर दर्शन करना चाहिए और विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। पूजा के दौरान माता को हल्दी, दही और बाजरा का भोग लगाया जाता है। कई स्थानों पर नीम के पत्तों का भी विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि नीम स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है और रोगों से बचाव में सहायक होता है।

शीतला अष्टमी का पर्व केवल धार्मिक आस्था से ही नहीं जुड़ा है, बल्कि यह स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का संदेश भी देता है। इस दिन आखिरी बार बासी भोजन करने की परंपरा मानी जाती है। इसके बाद लंबे समय तक बासी भोजन करने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन घर में पूजा करने के साथ-साथ शीतला माता के मंदिर जाना भी शुभ माना जाता है। इसके अलावा भगवान शिव की पूजा करने का भी विधान बताया गया है। कहा जाता है कि सच्चे मन और श्रद्धा से की गई पूजा से माता शीतला की कृपा बनी रहती है और परिवार को रोगों से सुरक्षा मिलती है।

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