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असम में कांग्रेस को लगा तगड़ा झटका : नगांव से सांसद प्रद्युत ने हाथ का साथ छोड़ पकड़ा कमल, चुनाव से भाजपा की बड़ी सेंध

नगांव से सांसद प्रद्युत ने हाथ का साथ छोड़ पकड़ा कमल, चुनाव से भाजपा की बड़ी सेंध
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admin

Mar 18, 202601:57 PM

नई दिल्ली। असम में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है। 9 अप्रैल को मतदान होगा और 4 मई को नतीजे आएंगे। इससे पहले राज्य में दलबदल का खेल शुरू हो गया है। इसी क्रम में कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए नगांव से पार्टी सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने हाथ का साथ छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया है। प्रद्युत बोरदोलोई ने बुधवार को दिल्ली में भाजपा की सदस्यता ली। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की मौजूदगी में असम भाजपा के अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने उन्हें सदस्यता ग्रहण कराई। मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि उनके भाजपा में शामिल होने से पार्टी और मजबूत होगी।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, आज, नगांव से मौजूदा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई भाजपा में शामिल हो गए हैं। हमारे प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने हमारी पार्टी में उनका स्वागत किया है। प्रद्युत बोरदोलोई नगांव लोकसभा से दो बार सांसद रह चुके हैं। वह तरुण गोगोई के नेतृत्व वाली कांग्रेस कैबिनेट में पूर्व मंत्री थे। इसके अलावा, वह एक पुराने कांग्रेसी हैं। कांग्रेस के साथ उनका जुड़ाव 1975 से है। इसलिए, भाजपा में उनके शामिल होने से हमारी पार्टी निश्चित रूप से और मजबूत होगी।

इस्तीफा के अलावा नहीं बचा था कोई विकल्पः प्रद्युत

वहीं, प्रद्युत बोरदोलोई ने कहा कि उनके पास कांग्रेस से इस्तीफा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी की असम इकाई के भीतर उन्हें बार-बार अपमानित किया गया और वहां काम करने के लिए अनुकूल माहौल नहीं था।

मुमकिन नहीं था फैसले को टालना

बोरदोलोई ने कहा, यह फैसला दर्दनाक था, लेकिन इसे टालना मुमकिन नहीं था। यह कदम उठाते हुए मुझे दुख हो रहा है, लेकिन मेरे पास कोई और विकल्प नहीं बचा था। मैं मानसिक रूप से आहत था और अंदर से पूरी तरह थक चुका था। सांसद ने दावा किया कि कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने कई मौकों पर उनका अपमान किया, जिससे उन्हें पार्टी में अकेलापन महसूस होने लगा था।

राजनीतिक करियर को लेकर कांग्रेस की भूमिका को भी किया स्वीकार

इसके साथ ही, बोरदोलोई ने अपने राजनीतिक करियर को संवारने में कांग्रेस की भूमिका को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा, कांग्रेस पार्टी ने मुझे बहुत कुछ दिया है। आज मैं जो कुछ भी हूं, वह कांग्रेस की ही बदौलत हूं। उन्होंने आगे कहा कि उनका यह फैसला पार्टी की विरासत के प्रति अनादर के कारण नहीं, बल्कि मौजूदा परिस्थितियों के कारण लिया गया है।

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