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इंदौर। इंदौर के भागीरथपुरा में जहरीले पानी से उपजी त्रासदी पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। सीएम ने मामले में कड़ा एक्शन लेते हुए इंदौर नगर निगम आयुक्त को नोटिस थमाकर जहां से जवाब मांगा है। वहीं अपर आयुक्त, प्रभारी अधीक्षण यंत्री पर गाज गिरा दी है। यही नहीं सीएम ने अपने इरादे जाहिर करते हुए दो टूक शब्दों में कहा है कि लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगग
सीएम मोहन ने ट्वीट कर क्या कहा?
सीएम ने घटना को लेकर लेकर सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि आज सुबह मुख्य सचिव और अन्य अधिकारियों के साथ इंदौर के दूषित पेयजल प्रकरण में राज्य शासन द्वारा की जा रही कार्रवाई की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। अपर मुख्य सचिव (नगरीय प्रशासन एवं विकास) द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर भी चर्चा की।
उन्होंने आगे लिखा कि इंदौर नगर निगम आयुक्त और अपर आयुक्त को इस सम्बन्ध में कारण बताओ नोटिस जारी करने, अपर आयुक्त को तत्काल इंदौर से हटाने और प्रभारी अधीक्षण यंत्री से जल वितरण कार्य विभाग का प्रभार वापस लेने के निर्देश दिए। इंदौर नगर निगम में आवश्यक पदों पर तत्काल प्रभाव से पूर्ति करने के निर्देश भी दिए।
इन पर पहले ही गिर चुकी है गाज
इससे पहले मुख्यमंत्री ने इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से नागरिकों के संक्रमित होने की घटना को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए संबंधित जोनल अधिकारी जोन क्रमांक 4, सहायक यंत्री और प्रभारी सहायक यंत्री पीएचई को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड और प्रभारी उपयंत्री पीएचई को तत्काल प्रभाव से सेवा से बाहर कर दिया था। घटना की जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की जांच समिति गठित की गई है।
मौत के आंकड़ों पर सस्पेंस
हैरान करने वाली बात यह है कि मामले में मुख्यमंत्री और प्रशासन भले ही सख्त कदम उठा रहे हैं, लेकिन मौतों की संख्या को लेकर असमंजस अभी भी बना हुआ है। प्रशासन ने केवल 4 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है। मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने 10 मौतों की जानकारी होने की बात स्वीकार की है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि एक 6 महीने के बच्चे समेत 15 लोगों की जान जा चुकी है।
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