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रायपुर। छत्तीसगढ़ में एक अनोखी शादी हुई है। कोंडागांव जिले में एक दूल्हे ने दो दुल्हनों के साथ एक ही मंडप पर फेरे लिए। दोनों दुल्हनों के परिवारों और समाज की सहमति से यह रिश्ता तय हुआ। शादी के कार्ड में भी दोनों दुल्हनों के नाम शामिल थे। एक शख्स ने दो दुल्हनों के साथ फेरे लेकर अपनी पत्नी स्वीकार किया। इस विवाह की सबसे बड़ी बात यह रही कि दूल्हे और दोनों दुल्हनों की पूरी सहमति से यह रिश्ता तय हुआ, जिसे परिवार और समाज ने भी स्वीकार किया।
फरसगांव ब्लॉक के बैलगांव में 24 मार्च को यह खास शादी पूरी परंपरा और रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुई। शादी से पहले छपे कार्ड में भी दोनों दुल्हनों के नाम शामिल किए गए थे, जो इलाके में चर्चा का विषय बना रहा। हल्दी, बारात और भोज समेत सभी रस्में धूमधाम से निभाई गईं। शादी के बाद दूल्हा और दोनों दुल्हनों ने डीजे की धुन पर जमकर डांस किया, वहीं बारातियों ने भी इस अनोखे विवाह का खूब जश्न मनाया।
दोनों दुल्हनों के पिता की हो चुकी है मौत
शादी के कार्ड के अनुसार, बैलगांव निवासी गजेंद्र यादव के बेटे हितेश की शादी हुई थी। उसने शंकरपुर के रहने वाले बुद्धुराम नाग की बेटी लबती (पहली दुल्हन) और बनियागांव के रहने वाले भावसिंह देहारी की बेटी यामिनी (दूसरी दुल्हन) से शादी की। दोनों दुल्हनों के पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। यह शादी पूरे विधि-विधान से संपन्न हुई। शादी की रस्में कोई चुपचाप तरीके से नहीं, बल्कि पूरे गाजे-बाजे और सामाजिक रजामंदी के साथ पूरी परंपरा का निर्वहण करते हुए हुई।
सामाजिक सहमति और कानून के बीच तालमेल
बस्तर के जनजातीय और ग्रामीण अंचलों में कई बार प्रेम प्रसंगों या विशेष परिस्थितियों के कारण उत्पन्न सामाजिक विवादों को सुलझाने के लिए रूढिगत नियमों का सहारा लिया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि तीनों परिवारों की आपसी सहमति और समाज के बुजुर्गों के आशीर्वाद से यह फैसला लिया गया, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद न हो। हालांकि, कानून में द्विपत्नी विवाह को मान्यता नहीं है, लेकिन बस्तर की सामाजिक समरसता के आगे अक्सर कानून की पेचीदगियां पीछे छूट जाती हैं।
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