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मप्र विस के बजट सत्र का आगाज : राज्यपाल के अभिभाषण में रोड़ा बना विपक्ष, देवड़ा पर टिकी जनता की निगाहें, पौने पांच लाख करोड़ का हो सकता है बजट

राज्यपाल के अभिभाषण में रोड़ा बना विपक्ष, देवड़ा पर टिकी जनता की निगाहें, पौने पांच लाख करोड़ का हो सकता है बजट
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admin

Feb 16, 202603:02 PM

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत सोमवार से हो गई है। कार्यवाही की शुरुआत में में वंदे मातरम् का गायन हुआ। इसके बाद राज्यपाल मंगु भाई पटेल ने अपना अभिभाषण दिया। राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विपक्ष ने हंगामा किया, जिसके बाद कार्यवाही अगले दिन 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। खास बात यह है कि प्रदेश की जनता की निगाहें 18 फरवरी पर टिकी हुईं हैं।

दरअसल इस दिन वित्त मंत्री जगीदेशी देवड़ा मप्र सरकार केवित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगे। इस बार का बजट पौने पांच लाख करोड़ रुपए (4.75 लाख करोड़) के आसपास हो सकता है। जो पिछले साल के बजट 4.21 लाख करोड़ से करीब 13 फीसदी ज्यादा हो सकता है। खास बात यह है कि बजट में सरकार ने किसी भी योजना के लिए नया प्रावधान नहीं किए हैं, जबकि सिंहस्थ 2028 के लिए बजट में विशेष प्रावधान किए जा सकते हैं। यह राशि 5 हजार करोड़ रुपए के आसपास हो सकती है। जो इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च की जाएगी।

केन्द्र के बजट से मप्र सरकार की उम्मीदों को झटका

हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए आम बजट से मप्र सरकार की बजट उम्मीदों को झटका मिला है। केंद्र की ओर से मप्र को कोई विशेष वित्तीय सहयोग बजट में नहीं किया है। यहां तक कि सिंहस्थ के लिए बजट में कोई प्रावधान नहीं है। कुछ केंद्रीय योजनाओं में भी मप्र को कम पैसा मिलने की संभावना है। ऐसे में सिंहस्थ समेत अन्य के लिए मप्र अपने स्तर पर बजट में विशेष प्रावधान करने जा रहा है।

बजट को दिया गया अंतिम रूप

बताया गया कि मप्र सरकार के बजट को अंतिम रूप दे दिया है। विधानसभा में होने वाली कैबिनेट बैठक में बजट को मंजूरी दी जाएगी। इसके बाद बजट विधानसभा में पेश किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि सरकार ने 2028 तक राज्य के बजट को 7.50 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा था। वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य का बजट 4.21 लाख करोड़ रुपये था, और 2026-27 के लिए यह करीब 4.75 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है।

केंद्र से मांगे थे 20 हजार करोड़

केंद्रीय बजट से पहले सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों की बैठक में मप्र के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने मप्र की मांगों को रखते हुए सिंहस्थ के लिए 20 हजार करोड़ रुपए मांगे थे। केंद्रीय बजट में 1 रुपए का प्रावधान नहीं किया है। साथ ही इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए भी मप्र के लिए विशेष प्रावधान करने की मांग की गई थी, केंद्रीय बजट से मप्र को राज्य राहत नहीं मिली है।

रोलिंग बजट की दिखेगी झलक

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव पिछले कुछ महीनों से वित्तीय बैठकों में श्रोलिंग बजट्य पर जोर देते देखे गए हैं। इसके बाद वित्त विभाग ने रोलिंग बजटप पर काम शुरू किया। हाल ही में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आगामी बजट के संबंध में वित्तीय अधिकारियों की अहम बैठक की है, जिसमें बजट के अंतिम स्वरूप पर चर्चा की गई। इस साल बजट में खास बात यह देखने को मिलेगी कि अगले वित्तीय वर्षों के अनुमानित प्रावधानों का भी उल्लेख किया जा सकता है। जिसे श्रोलिंग बजट्य कहा जा रहा है। इसमें 2026-27, 2027-28 और 2028-29 के लिए बजट तैयार किए जाएंगे, जिनकी सालाना समीक्षा और समायोजन होगा। इसके पीछे सरकार की मंशा लंबी अवधि की नीति और परियोजनाओं से है। बजट के जानकारों का कहना है कि केंद्रीय करों में मप्र की हिस्सेदारी कम होने से राज्य के बजट का आकार लगभग 7500 करोड़ रुपये तक सिकुड़ जाएगा। अभी तक मप्र की हिस्सेदारी 7.850 फीसदी थी, जो अब घटकर 7.347 फीसदी हो गई है। इससे अगले पांच साल तक मप्र केा हर साल करीब 7,500 करोड़ रुपये कम मिलेंगे। जिसका सीधा असर राज्य सरकार की वित्तीय सेहर पर पड़ेगा।

5 लाख करोड़ से ज्यादा होगा कर्ज

प्रदेश का बजट पौने पांच लाख करोड़ होगा, वहीं कर्ज भी पांच लाख करोड़ से ज्यादा पहुंचने जाएगा। वर्तमान में सरकार के ऊपर 4.65 लाख करोड़ रुपए का कर्जा है। चालू वित्त वर्ष में सरकार का कर्ज लेने का अनुमान 78 हजार करोड़ रुपए है, जो अगले वितीय वर्ष में बढ़कर 1 लाख करोड़ से ज्यादा हो जाएगा। वित्त अधिकारी बताते हैं कि बड़ी राशि कर्ज का ब्याज चुकाने में ही जाती है। 2020-21 में सरकार सालभर में 31,686 करोड़ उधार लेती थी, जो अगले वितीय वर्ष में 1 लाख करोड़ से ज्यादा पहुंच रही है। यानी 6 साल में सालाना कर्ज लेने की जरूरत ढाई गुना बढ़ गई है। बताया गया कि केंद्रीय करों से मप्र को जो घाटा होगा, उसकी भरपाई शराब आदि विलासिता की चीजों पर टैक्स बढ़ाकर पूर्ति की जा सकती है।

लाड़ली बहना की बढ़ सकती है राशि

सरकार बजट में लाड़ली बहना के लिए प्रावधान कर सकती है। वर्तमान में योजना के तहत पात्र महिला को 1500 रुपए महीना मिलते हैं। अगले साल सरकार 250 रुपए की बढेत्तरी कर सकती है। इसके लिए सरकार करीब 5 हजार करोड़ रुपए का विशेष प्रावधान कर सकती है। इसके अलावा सामाजिक पेंशन को बढ़ाने पर बजट में विचार हो सकता है।

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