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जनजातीय गौरव दिवस : पीएम मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा को किया नमन, बोले- भव्य आयोजन के साथ हम बन रहे भारत पर्व की पूर्णता के साक्षी

पीएम मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा को किया नमन, बोले- भव्य आयोजन के साथ हम बन रहे भारत पर्व की पूर्णता के साक्षी
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admin

Nov 15, 202504:21 PM

नर्मदा। भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुजरात के दौरे पर पहुंचे। जहां वे नर्मदा में आयोजित जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम को संबोधित किया। इससे पहले पीएम ने भगवान बिरसा मुंडा को पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने कार्यक्रम से विकास और जनजातीय कल्याण से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया।

नर्मदा में भगवान बिरसा मुंडा को नमन करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मां नर्मदा की ये पावन धरती आज एक और ऐतिहासिक आयोजन की साक्षी बन रही है। अभी 31 अक्टूबर को हमने यहां सरदार पटेल की 150वीं जयंती मनाई। हमारी एकता और विविधता को सेलिब्रेट करने के लिए भारत पर्व शुरू हुआ है। आज भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के इस भव्य आयोजन के साथ हम भारत पर्व की पूर्णता के साक्षी बन रहे हैं।

जनजातीय गौरव भारत की गौरव का अभिन्न हिस्सा

उन्होंने कहा कि 2021 में हमने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की थी। जनजातीय गौरव हजारों वर्षों से हमारे भारत की चेतना का अभिन्न हिस्सा रहा है। पीएम मोदी ने कहा, जब-जब देश के सम्मान, स्वाभिमान और स्वराज की बात आई, तो हमारा आदिवासी समाज सबसे आगे खड़ा हुआ। हमारा स्वतंत्रता संग्राम इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। स्वतंत्रता आंदोलन में ट्राइबल समाज के योगदान को हम भुला नहीं सकते।

विकास और जनजातीय कल्याण से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण और शिलान्यास करने के बाद पीएम मोदी ने कहा कि स्वास्थ्य, सड़क और यातायात से जुड़े कई और प्रोजेक्ट्स शुरू हुए हैं। मैं इन सभी विकास कार्यों के लिए, सेवा कार्यों के लिए, कल्याणकारी योजनाओं के लिए आप सभी को विशेषकर के गुजरात और देश के जनजातीय परिवारों को बधाई देता हूं।

कोई याद नहीं करने वाला था भगवान बिरसा मुंडा को

पीएम मोदी ने कहा कि 2014 के पहले भगवान बिरसा मुंडा को कोई याद करने वाला नहीं था। सिर्फ उनके अगल-बगल के गांव तक ही पूछा जाता था। आज देशभर में कई ट्राइबल म्यूजियम बनाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि श्री गोविंद गुरु चेयर जनजातीय भाषा संवर्धन केंद्र की स्थापना भी हुई है। यहां भील, गामित, वसावा, गरासिया, कोकणी, संथाल, राठवा, नायक, डबला, चैधरी, कोकना, कुंभी, वर्ली, डोडिया... ऐसी सभी जनजातियों की बोलियों पर अध्ययन होगा। उनसे जुड़ी कहानियों और गीतों को संरक्षित किया जाएगा।

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