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सोमनाथ स्वाभिमान पर्व : पीएम मोदी ने सांस्कृतिक अटूटता और संघर्ष की गाथा को याद किया, 2001 के कार्यक्रम की झलकियां भी की शेयर

पीएम मोदी ने सांस्कृतिक अटूटता और संघर्ष की गाथा को याद किया, 2001 के कार्यक्रम की झलकियां भी की शेयर
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admin

Jan 08, 202612:24 PM

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार से शुरू हो रहे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर भारत की सांस्कृतिक अटूटता और संघर्ष की गाथा को याद किया है। उन्होंने कहा कि अटूट आस्था के एक हजार वर्ष का यह अवसर हमें राष्ट्र की एकता के लिए निरंतर प्रयासरत रहने की प्रेरणा देता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आज से शुभारंभ हो रहा है। एक हजार साल पहले जनवरी 1026 में सोमनाथ मंदिर ने अपने इतिहास का पहला आक्रमण झेला था। साल 1026 का आक्रमण और उसके बाद हुए अनेक हमले भी हमारी शाश्वत आस्था को डिगा नहीं सके, बल्कि इनसे भारत की सांस्कृतिक एकता की भावना और सशक्त हुई और सोमनाथ का बार-बार पुनरोद्धार होता रहा।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ की अपनी पिछली यात्राओं की कुछ तस्वीरों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किया। उन्होंने देशवासियों से भी अपील की कि अगर वे भी सोमनाथ गए हैं, तो अपनी तस्वीरें हैशटैग सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के साथ जरूर शेयर करें।

यह असंख्य सपूतों को स्मरण करने का पर्व

उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का ये अवसर भारत माता के उन असंख्य सपूतों को स्मरण करने का पर्व है, जिन्होंने कभी अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता नहीं किया। समय कितना ही कठिन और भयावह क्यों ना रहा हो, उनका संकल्प हमेशा अडिग रहा। हमारी सभ्यता और सांस्कृतिक चेतना के प्रति उनकी निष्ठा अटूट रही। अटूट आस्था के एक हजार वर्ष का ये अवसर हमें राष्ट्र की एकता के लिए निरंतर प्रयासरत रहने की प्रेरणा देता है।

पीएम ने यह भी लिखा

प्रधानमंत्री मोदी ने 31 अक्टूबर 2001 को सोमनाथ में आयोजित हुए एक कार्यक्रम की कुछ झलकियां भी शेयर कीं। उन्होंने बताया कि यह वो साल था, जब 1951 में पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन के 50 साल पूरे होने का उत्सव मनाया गया था। उन्होंने लिखा, 1951 में वो ऐतिहासिक समारोह तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की मौजूदगी में संपन्न हुआ था। सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में सरदार पटेल और केएम मुंशी जी के साथ ही कई महान विभूतियों के प्रयास अत्यंत उल्लेखनीय रहे हैं। साल 2001 के इस कार्यक्रम में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल जी और गृह मंत्री आडवाणी जी और कई प्रमुख लोग शामिल हुए थे। उन्होंने अपनी पोस्ट के आखिर में लिखा, साल 2026 में हम 1951 में हुए भव्य समारोह के 75 वर्ष पूर्ण होने का भी स्मरण कर रहे हैं।

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