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नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल का यह चुनावी साल है। चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है, वैसे ही सियासी घमासान भी तेज होता जा रहा है। गुरुवार प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी के बाद से तो बंगाल का सियासी पारा एकदम से हाई हो गया है। सत्तारूढ़ दल टीएमसी और भाजपा दोनों ही दल एक-दूसरे पर हमलवार हैं।
कोलकाता में आई-पैक पर ईडी के छापों के विरोध में तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने शुक्रवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया, हालांकि बिना अनुमति प्रदर्शन करने पर दिल्ली पुलिस ने डेरेक ओ ब्रायन, कीर्ति आजाद और महुआ मोइत्रा समेत 8 सांसदों को हिरासत में ले लिया था। टीएमसी नेताओं को हिरासत में लिया जाने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भड़क गई है।
लोकतंत्र भाजपा की निजी संपत्ति नहीं
ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, मैं हमारे सांसदों के साथ किए गए शर्मनाक और गलत बर्ताव की कड़ी निंदा करता हूं। गृह मंत्री के कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन करने के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए चुने हुए प्रतिनिधियों को सड़कों पर घसीटना कानून लागू करना नहीं है। यह वर्दी में घमंड है। यह लोकतंत्र है, भाजपा की निजी संपत्ति नहीं है।
सत्ता में बैठै लोगों की सुविधा-आराम से नहीं चलता लोकतंत्र
उन्होंने आगे लिखा कि लोकतंत्र सत्ता में बैठे लोगों की सुविधा या आराम से नहीं चलता। जब भाजपा नेता विरोध प्रदर्शन करते हैं तो वे रेड कार्पेट और खास सुविधाओं की उम्मीद करते हैं। जब विपक्षी सांसद अपनी आवाज उठाते हैं तो उन्हें घसीटा जाता है, हिरासत में लिया जाता है और अपमानित किया जाता है।
यह हमारा भारत, हम अधिकार से हैं नागरिक
ममता बनर्जी ने आगे लिखा कि यह साफ हो जाना चाहिए कि सम्मान आपसी होता है। आप हमारा सम्मान करेंगे और हम आपका सम्मान करेंगे। आप हमें सड़क पर घसीटेंगे और हम आपको सहिष्णुता, असहमति और लोकतांत्रिक नैतिकता के संवैधानिक विचार पर वापस लाएंगे। यह हमारा भारत है। हम अधिकार से नागरिक हैं, किसी कुर्सी, बैज या सत्ता की स्थिति की दया पर नहीं। कोई भी सरकार, कोई भी पार्टी और कोई भी गृह मंत्री यह तय नहीं कर सकता कि लोकतंत्र में कौन गरिमा का हकदार है।
प्रदर्शन में यह नेता रहे शामिल
विरोध प्रदर्शन करने में तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन, शताब्दी रॉय, महुआ मोइत्रा, बापी हलदर, साकेत गोखले, प्रतिमा मंडल, कीर्ति आजाद और डॉ. शर्मिला सरकार धरने में शामिल थे। प्रदर्शन के दौरान, तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने नारे लगाए और आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार चुनाव से पहले विपक्षी पार्टियों को परेशान करने के लिए जांच एजेंसियों का गलत इस्तेमाल कर रही है। सांसदों को विरोध जताने के लिए पोस्टर के साथ भी देखा गया।
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