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इंदौर। इंदौर के भागीरथपुरा में जहरीला पानी पीने से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 400 से पीड़ित अस्पतालों में भर्ती हैं। इस पूरे मामले में इंदौर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने मंगलवार को जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जिला प्रशासन को खूब खरी-खोरी सुनाई। इस दौरान कोर्ट ने यह भी दो टूक शब्दों में कहा कि स्वच्छ पानी जनता का मौलिक अधिकार है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि इंदौर को देश के सबसे स्वच्छ शहर का गौरव हासिल है, लेकिन दूषित पेयजल की इस घटना ने पूरे भारत में शहर की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं
दोषियों पर कार्रवाईर: भविष्य में जरूरत पड़ने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सिविल और क्रिमिनल लायबिलिटी (दीवानी और आपराधिक जिम्मेदारी) तय की जाएगी।
मुख्य सचिव की उपस्थिति: मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी, जिसमें प्रदेश के मुख्य सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित रहने का आदेश दिया गया है।
मुफ्त इलाज और रिपोटर्र: कोर्ट ने सभी प्रभावित मरीजों को मुफ्त इलाज मुहैया कराने और अब तक हुई मौतों पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पीड़ितों के मुआवजे की समीक्षा करने के भी संकेत दिए हैं।
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