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नए श्रम कानूनों के खिलाफ हड़ताल पर संगठनों का फूटा गुस्सा : कहा- ट्रेड यूनियन राजनीतिक आकाओं के इशारों पर कर रहीं प्रदर्शन

कहा- ट्रेड यूनियन राजनीतिक आकाओं के इशारों पर कर रहीं प्रदर्शन
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admin

Feb 12, 202611:46 AM

भोपाल-बिलासपुर। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई संगठनों ने नए श्रम कानूनों के खिलाफ हड़ताल का विरोध किया है और इसे राजनीति से प्रेरित बताया है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाली ट्रेड यूनियन अपने राजनीतिक आकाओं के इशारों पर मजदूरों के कंधे पर बंदूक रखकर चला रही हैं। पिछले 42 सालों से ट्रेड यूनियनों व वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तरों पर काम कर रहे दीपक जायसवाल ने केंद्र सरकार के नए श्रम कानूनों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा और उनके स्वास्थ्य पर ध्यान दिया।

नेशनल फ्रंट ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (एनएफआईटीयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष दीपक जायसवाल ने कहा, ष्दो दशकों से ज्यादा समय से लेबर कानूनों की समीक्षा के लिए बर्मा कमीशन मौजूद था। 1947 के कॉलोनियल समय के कई लेबर कानून पुराने हो चुके थे। इन कानूनों को मौजूदा जरूरतों के हिसाब से एक साथ लाने और अपडेट करने की बहुत ज्यादा मांग थी। हालांकि, पिछली सरकारों ने सिफारिशों को लागू नहीं किया। केंद्र में भाजपा सरकार ने कदम उठाए और अलग-अलग संगठनों के साथ 100 से अधिक बार वार्ताएं कीं। सरकार ने पुराने श्रम कानूनों में सरलीकरण करके नए नियम बनाए।

एनएफआईटीयू के महासचिव विराट जायसवाल ने कहा कि नए श्रम कानून विकसित भारत 2047 के लिए मील का पत्थर साबित होंगे। गिग वर्कर्स से लेकर मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा तक नए कानूनों के कई फायदे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ संगठनों ने देशव्यापी हड़ताल का प्रोपेगेंडा खड़ा करने की कोशिश की है। यह सिर्फ राजनीतिक हड़ताल है। इससे मजदूर वर्ग का कोई लेना-देना नहीं है। प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाली ट्रेड यूनियन अपने राजनीतिक आकाओं के इशारों पर मजदूरों के कंधे पर बंदूक रखकर चला रही हैं। वास्तविकता से इन ट्रेड यूनियन का वास्ता नहीं है।

फाइट फॉर राइट के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर उमंग बंसल ने कहा कि यह पूरी ही राजनीतिक से प्रेरित हड़ताल है और इसका असर देश में नहीं पड़ने वाला है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जो योजनाएं बनाई हैं, वह श्रमिकों के हित में बनाई हुई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नियमों में किसी तरह की कोई कमियां हो सकती हैं, लेकिन इस तरह से हड़ताल कर सरकार को दबाया नहीं जा सकता है, बल्कि मिल-बैठकर सरकार को उन कमियों के बारे में जानकारी देनी होगी।

ऑल इंडिया बीएचईएल एम्प्लाईज यूनियन के नेता सतेंद्र कुमार ने कहा कि गुरुवार को बुलाई गई हड़ताल राजनीतिक महत्वाकांक्षा से प्रेरित है। उन्होंने नए कानूनों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ये श्एक देश-एक कानूनश् की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। सरकार ने कर्मचारी हितैषी फैसले लिए और श्रम कानूनों को आसान बनाया। इससे मजदूर वर्ग को समान काम, समान वेतन और सामाजिक सुरक्षा दी गई है।

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