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नई दिल्ली। धार के ऐतिहासिक भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने एएसआई सर्वे को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने स्पष्ट किया कि इस मामले से संबंधित सभी आपत्तियों और साक्ष्यों पर विचार मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ही करेगा। अदालत ने मुस्लिम पक्ष को निर्देश दिया कि वे अपनी मांगें हाईकोर्ट के समक्ष रखें।
मामले में वकील विष्णु शंकर जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि मौला कमालुद्दीन की ओर से एक स्पेशल लीव पिटीशन दायर की गई थी। इस याचिका में 11 मार्च 2024 के आदेश के तहत हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण सर्वे की वीडियोग्राफी की कॉपी उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग पर कोई सीधा आदेश देने के बजाय कहा कि इस मुद्दे पर हाईकोर्ट ही निर्णय करेगा।
मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का किया था रुख
दरअसल, मुस्लिम पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रही कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी ने हाईकोर्ट की इंदौर बेंच की कार्यवाही पर असंतोष जताते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सोसायटी का कहना था कि उनकी आपत्तियों पर समुचित सुनवाई नहीं हो रही है, इसलिए शीर्ष अदालत को हस्तक्षेप करना चाहिए।
सोसायटी ने यह भी आपत्ति जताई कि 2 अप्रैल को प्रस्तावित सुनवाई से पहले 1 अप्रैल को ही उनकी बात सुनी जानी चाहिए थी। उनका तर्क था कि बिना उनकी आपत्तियों पर विचार किए आगे की प्रक्रिया जारी रखना उचित नहीं है।
एएसआई सर्वे की वीडियोग्राफी से जुड़ा है विवाद
विवाद का एक प्रमुख पहलू एएसआई सर्वे की वीडियोग्राफी से जुड़ा है। सोसायटी के अध्यक्ष अब्दुल समद के अनुसार, 11 मार्च को हुए सर्वे की रिकॉर्डिंग उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई और 16 मार्च की सुनवाई में भी इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट निर्देश नहीं मिला।
इसके अलावा, सोसायटी ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की मूल याचिका की वैधता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है, फिर भी मामले को आगे बढ़ाया जा रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद इस संवेदनशील मामले में आगे की सुनवाई 2 अप्रैल को हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में होगी, जिस पर सभी पक्षों की नजरें टिकी हैं।
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