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भोपाल। धार जिले में 304 करोड़ की लागत से बनाए जा रहे कारम बांध फूटने और घोटाले की 349 पेज की जांच रिपोर्ट राज्य शासन को सौंप दी है। इसमें जल संसाधन विभाग के 5 इंजीनियरों को जिम्मेदार ठहराया गया है जबकि साक्ष्यों के अभाव में 3 इंजीनियरों को दोषमुक्त किया है। जांच अधिकारी ने दोषियों के खिलाफ विभागीय जांच की अनुशंसा की है। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि बांध का फूटना सामान्य घटना नहीं थी, बल्कि बांध को बारिश में अपूर्ण छोड़कर मानव निर्मित आपदा को निमंत्रण दिया गया था। जांच रिपोर्ट में ठेकेदार दिल्ली की कंपनी एएनएस कंस्ट्रशन को भी जिम्मेदार ठहराया गया है।
अगस्त 2022 में बारिश के दौरान बांध में क्षमता से ज्यादा पानी आने पर बांध फूट गया था। हालांकि मानव त्रासदी रोकने के लिए सरकार ने बांध को किनारे से काटकर बांध का पानी खाली किया। जल संसाधन विभाग के सचिव जॉन किंग्सली ने साढ़े तीन साल तक चली जांच में उल्लेख किया है कि 45 एमसीएम क्षमता के बांध में नाले को रोका गया था, लेकिन बारिश में बांध का निर्माण अूधरा छोड़ दिया था। बांध निर्माण में गुणवत्ता और मानकों का ध्यान नहीं रखा। बांध के डाउन स्ट्रीम में मौजूद 18 गांवों की आबादी को खतरे में डाला गया। जांच अधिकारी ने रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि केंद्रीय जल आयोग के निर्देशन में काम करने के बाद भी दो साल तक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। ऐसे में आयोग को बार-बार पत्र लिखकर रिमाइंडर देना पड़ा है। वहीं आरोपी अधिकारियों ने तर्क दिया कि कोई जनहानि नहीं हुई, इस तर्क की वजह से उन्हें दोष मुक्त नहीं किया जा सकता है। आरोपियों के खिलाफ जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता 17 फरवरी को सुनवाई करेंगे।
रिपोर्ट में ये इंजीनियर गुनहगार
जल संसाधन विभाग की जांच रिपोर्ट में सीएस घटोल प्रभारी मुख्य अभियंता नर्मदा ताप्ती कछार, पी. जोशी तत्कालीन अधीक्षण यंत्री जल संसाधन मंडल धार, बीएल निनामा तत्कालीय कार्यपालन यंत्री जल संसाधन संभाग क्रमांक एक धार, विकार अहमद सिद्दीकी तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी जल संसाधन उपसंभाग धामनोद और विजय कुमार जत्थाप तत्कालीन उपयंत्री जल संसाधन उपसंभाग धामनोद पर कारम डैम फूटने को लेकर लगाए गए आरोप प्रमाणित पाए गए हैं जबकि राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव तत्कालीन उपयंत्री जल संसाधन उपसंभाग धामनोद को विभागीय जांच से मुक्त किया गया है। अशोक कुमार राम तत्कालीन उपयंत्री जल संसाधन उपसंभाग धामनोद और सुश्री दशवंता सिसोदिया तत्कालीन उपयंत्री जल संसाधन उपसंभाग धामनोद पर भी आरोप प्रमाणित नहीं पाए गए।
प्रशासनिक अधिकारियों को बताया जिम्मेदार
रिपोर्ट में बताया कि विभागीय जांच के दौरान कुछ आरोपी इंजीनियरों ने तर्क दिया कि बांध पूरी तरह सुरक्षित था। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा बांध में कट लगाने का निर्णय लिया गया, अगर ऐसा नहीं किया जाता तो बांध सुरक्षित रहता। इस कार्य से शासन को कोई वित्तीय हानि नहीं हुई है। जबकि रिपोर्ट में धार कलेक्टर के पत्र के हवाले से बताया कि कारम बांध फूटने से प्रभावितों को 14 लाख 70 हजार का भुगतान करना पड़ा था।
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