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नई दिल्ली। लोकसभा में आज नक्सलवाद जैसे गंभीर और लंबे समय से देश को प्रभावित करने वाले मुद्दे पर अहम चर्चा हुई, जिसमें सत्ता और विपक्ष के कई प्रमुख नेताओं ने अपने विचार रखे। बहस के दौरान केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह, अमित शाह, असदुद्दीन ओवैसी, कंगना रनौत और अनुराग ठाकुर जैसे दिग्गजों ने अपनी बात रखी। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने सुरक्षा और विकास के क्षेत्र में बड़े बदलाव देखे हैं। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि सरकार नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है और 2026 तक इस दिशा में उल्लेखनीय सफलता हासिल की गई है। छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलवाद को लेकर शाह ने कांग्रेस को भी आड़े हाथों लिया।
अमित शाह ने कहा कि सबसे पहले मैं रेड कॉरिडोर के नाम से पहचाने जाने वाले पूरे क्षेत्र, जिसमें 12 राज्य और 70 प्रतिशत का भूभाग शामिल थे, उसमें रह रही जनसंख्या की तरफ से सदन को धन्यवाद देना चाहता हूं। उन्होंने कहा कि आज बस्तर से नक्सलवाद लगभग-लगभग समाप्त हो चुका है। बस्तर के अंदर हर गांव में स्कूल बनाने की मुहिम चली। बस्तर के अंदर हर गांव में राशन की दुकान खोलने की मुहिम चली। मैं इतना ही पूछना चाहता हूं कि जो लोग कह रहे हैं कि अब तक आदिवासियों का विकास क्यों नहीं हुआ? तो, वो खुद बताएं कि 70 सालों से उन्होंने क्या किया?
झुठलाया जा रहा सत्य को
शाह कहा कि 2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद देश के हर गरीब को घर मिला, गैस मिला, शुद्ध पीने का पानी मिला, 5 लाख तक का स्वास्थ्य का बीमा मिला, प्रति व्यक्ति, प्रतिमाह 5 किलो मुफ्त अनाज मिला... लेकिन, ये बस्तर वाले क्यों छूट गए थे? उन्होंने कहा कि मैं इसलिए कह रहा हूं कि सत्य को झुठलाया जा रहा है। ये बस्तर वाले इसलिए छूट गए थे, क्योंकि वहां लाल आतंक की परछाई थी, इसलिए वहां विकास नहीं पहुंचा। मोदी सरकार में आज वो परछाई हट गई है, और इसलिए आज बस्तर विकास कर रहा है। ये नरेंद्र मोदी की सरकार है, जो हथियार उठाएगा, उसका हिसाब चुकता होगा।
गिरेबां में झांककर देखो दोषी कौन
उन्होंने कहा, मैं पूछना चाहता हूं कि 75 साल में 60 साल तो शासन आपने किया, आदिवासी अभी तक विकास से क्यों वंचित रहे? आदिवासियों का विकास तो अब नरेंद्र मोदी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 60 साल आपने (कांग्रेस) उन्हें घर नहीं दिया, पानी नहीं दिया, स्कूल नहीं बना, बैंक की फैसिलिटी नहीं पहुंचने दिया, इसलिए पहले थोड़ा अपनी गिरेबां में झांककर देखो कि दोषी कौन है।
माओवादी हिंसा आंतरिक सुरक्षा की बड़ी चुनौती
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि कई आदिवासी सांसद केवल वोट बैंक की राजनीति के कारण पार्टी के साथ खड़े रहे, लेकिन उन्होंने अपने समाज के विकास के लिए ठोस काम नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुद स्वीकार किया था कि माओवादी हिंसा देश की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती है, फिर भी उस समय प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप
अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने नक्सलवाद की समस्या को कभी गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी इलाकों में विकास कार्यों की कमी के कारण वहां असंतोष बढ़ा, जिससे नक्सलवाद को बढ़ावा मिला। उनके अनुसार, सरकार की कमजोर नीतियों ने इस समस्या को और गहरा किया।
2014 के बाद बदलाव का दावा
शाह ने कहा कि 2014 में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद कई बड़े और निर्णायक फैसले लिए गए। उन्होंने धारा 370 और 35ए हटाने, राम मंदिर निर्माण, जीएसटी लागू करने और महिलाओं को 33त्न आरक्षण देने जैसे कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन वर्षों में देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा मजबूत हुई है।
नक्सलवाद मुक्त भारत का लक्ष्य
अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद से मुक्त भारत का सपना अब साकार होता दिख रहा है। उन्होंने इसे सरकार की मजबूत नीतियों और सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई का परिणाम बताया और इसे देश के लिए एक बड़ा सकारात्मक बदलाव बताया।
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