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भोपाल। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में 23 बच्चों की मौत से जुड़े बहुचर्चित जहरीले कफ सिरप कांड में जांच अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मंगलवार को न्यायालय में पूरक और अंतिम चालान पेश कर दिया। इस चालान में हाल ही में गिरफ्तार किए गए दो शिशु रोग विशेषज्ञों डॉ. एस.एस. ठाकुर और अमन सिद्दीकी के खिलाफ साक्ष्यों और जब्त दस्तावेजों का विस्तृत विवरण शामिल है।
इस मामले की शुरुआत 4 अक्टूबर 2025 को हुई थी, जब परासिया के बीएमओ डॉ. अंकित सहलाम की शिकायत पर थाना परासिया में प्रकरण दर्ज किया गया। प्रारंभिक जांच के दौरान शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण सोनी को गिरफ्तार किया गया था। बाद में जांच का दायरा बढ़ाते हुए तमिलनाडु से जुड़े तीन आरोपियों सहित कुल नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया। इन सभी के खिलाफ एसआईटी ने पहले ही आरोप पत्र प्रस्तुत कर दिया था।
नए तथ्यों और साक्षों के आधार पर एसआईटी ने और दो डाॅक्टरों को किया था अरेस्ट
जांच के दौरान सामने आए नए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर एसआईटी ने दो और डॉक्टरों को गिरफ्तार किया। इसके बाद पूरक चालान दाखिल कर जांच को पूर्ण घोषित कर दिया गया है। एसआईटी प्रमुख एवं डीएसपी जितेंद्र जाट ने बताया कि सभी गवाहों के बयान, वैज्ञानिक रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर विवेचना पूरी कर ली गई है और अब आगे की कार्रवाई न्यायालय में होगी।
विशेषज्ञों की मेडिकल रिपोर्ट ने इस मामले में अहम भूमिका निभाई। जिन बच्चों की मौत हुई थी, उनके पोस्टमार्टम और क्लीनिकल जांच में समान लक्षण पाए गए। रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया कि सभी मौतें जहरीले कफ सिरप के सेवन से हुईं, जिससे जांच को स्पष्ट दिशा मिली।
पीड़ित परिवारों ने जांच पर उठाए सवाल
हालांकि, पीड़ित परिवारों ने जांच पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि परासिया के स्टेशन रोड स्थित एक अन्य डॉक्टर ने भी बीमार बच्चों को यही कफ सिरप लेने की सलाह दी थी, लेकिन उसके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। जबकि उसके क्लीनिक के सामने स्थित दो मेडिकल स्टोरों को सील किया जा चुका है। पीड़ित पक्ष के वकील संजय पटोरिया का कहना है कि न्यायालय के निर्देश पर इस मामले में आरोपियों की संख्या और बढ़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच के कुछ पहलुओं पर अभी और कार्रवाई की आवश्यकता है।
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