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कोई भी व्यक्ति नियमों से ऊपर नहीं, चाहे पीएम ही क्यों न हों : लोकसभा में बोले स्पीकर, राहुल के आरोपों का भी दिया जवाब

लोकसभा में बोले स्पीकर, राहुल के आरोपों का भी दिया जवाब
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admin

Mar 12, 202601:04 PM

नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव चर्चा के बाद खारिज हो गया है। इसके बाद वे फिर काम लौट आए हैं। बिरला ने गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही फिसंभालते हुए बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष का होना बेहद जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन में नेता प्रतिपक्ष या किसी भी सदस्य को बोलने से कभी नहीं रोका गया और संसद के नियम सभी के लिए समान रूप से लागू होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी व्यक्ति नियमों से ऊपर नहीं है, चाहे वह प्रधानमंत्री ही क्यों न हों।

स्पीकर ओम बिरला ने बताया कि अविश्वास प्रस्ताव पर पिछले दो दिनों में 12 घंटे से अधिक समय तक चर्चा हुई, ताकि सभी सांसदों को अपनी बात रखने का अवसर मिल सके। उन्होंने कहा कि यह सदन देश के 140 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करता है और हर सांसद यहां अपनी जनता की समस्याओं और अपेक्षाओं को लेकर आता है। उन्होंने हमेशा कोशिश की कि सभी सांसद नियमों के तहत अपनी बात रखें और जो सदस्य कम बोलते हैं उन्हें भी बोलने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उनके अनुसार, संवाद और चर्चा से ही लोकतंत्र मजबूत होता है।

बिरला ने सदन को बताया विचारों का जीवंत मंच

बिरला ने सदन को विचारों का जीवंत मंच बताते हुए कहा कि पिछले दो दिनों में सभी सदस्यों के विचारों को गंभीरता से सुना गया। उन्होंने कहा कि वह हर सदस्य के आभारी हैं, चाहे वे सरकार की आलोचना ही क्यों न करते हों। यही लोकतंत्र की खूबसूरती है कि यहां हर आवाज को महत्व दिया जाता है। उन्होंने कहा कि स्पीकर की कुर्सी किसी व्यक्ति की नहीं बल्कि लोकतंत्र की महान भावना का प्रतीक है।

विपक्ष के आरोपों का भी दिया जवाब

विपक्ष की शिकायतों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष या किसी भी सदस्य को नियमों के तहत बोलने का पूरा अधिकार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ लोगों का मानना है कि सदन के नेता नियमों से ऊपर होते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। उन्होंने बताया कि नियम 372 के तहत प्रधानमंत्री को भी सदन में बोलने से पहले अध्यक्ष की अनुमति लेनी होती है।

माइक बंद करने के आरोपों पर भी बिरला ने सफाई दी और कहा कि चेयर के पास माइक बंद करने का कोई बटन नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल में सभी महिला सांसदों को अपनी बात रखने का अवसर मिला है।

सदन की व्यवस्था बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी

सदन में निलंबन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि हालांकि उनके सभी दलों के सांसदों से व्यक्तिगत संबंध अच्छे हैं, लेकिन सदन की व्यवस्था बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है। जब सदस्य नियमों का पालन नहीं करते तो कभी-कभी निलंबन जैसे कठोर फैसले लेने पड़ते हैं। उन्होंने सभी सांसदों से सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील भी की।

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