Download App

Latest News

प्यार और बदले की आग में तपती 'ओ रोमियो' : शाहिद कपूर के दमदार अभिनय ने जीता दर्शकों का दिलपवन सिंह ने नहीं किया सपोर्ट : रियलिटी शो द 50 से बाहर आई डिंपल सिंह ने उठाए सवालटी20 विश्व कप 2026 : नामीबिया के खिलाफ तूफानी पारी खेलकर ईशान ने जाहिर किए ईरादे, पाकिस्तान को किया आगाहसर्राफा बाजार में उथल-पुथल का दौर : गिरावट के बाद फिर संभली कीमती धातुएं, जाने सोना-चांदी के ताजा भाव

वेस्ट मैनेजमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को नहीं करते मजबूत : भोपाल नगर निगम की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, जानें क्या है पूरा मामला

भोपाल नगर निगम की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, जानें क्या है पूरा मामला
a

admin

Feb 13, 202604:24 PM

नई दिल्ली-भोपाल। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा है कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों में बार-बार बदलाव करने से जमीनी हकीकत में तब तक सुधार नहीं होगा, जब तक अधिकारी आने वाले सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम, 2026 के हिसाब से वेस्ट मैनेजमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत नहीं करते।

जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने भोपाल नगर निगम द्वारा दायर उन अपीलों की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की, जिनमें राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) की केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ, भोपाल द्वारा लगाए गए भारी पर्यावरणीय मुआवजे को चुनौती दी गई थी। ग्रीन ट्रिब्युनल ने अपने 31 जुलाई 2023 और 11 अगस्त 2023 के विवादित आदेशों के माध्यम से, नगर निकाय को क्रमशः 1.80 करोड़ रुपए और 121 करोड़ रुपए का पर्यावरणीय मुआवजा देने का निर्देश दिया था।

सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में नगरपालिका अपशिष्ट प्रबंधन को नियंत्रित करने वाली विकसित हो रही वैधानिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कहा कि नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (प्रबंधन और संचालन) नियम, 2000 को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 द्वारा प्रतिस्थापित किया गया था, जिसे अब ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया है, जो 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने वाला है, हालांकि जस्टिस मिथल की अध्यक्षता वाली पीठ ने जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन में मौजूद कमियों पर चिंता व्यक्त की।

आदेश में कहा गया है, ष्अदालत का मानना है कि जमीनी स्तर पर कई कारकों के कारण वैधानिक तंत्र वांछित परिणाम नहीं दे रहा है।ष्

नए नियमों की शुरुआत को ष्स्वागत योग्य कदमष् बताते हुए शीर्ष अदालत ने चेतावनी दी कि जब तक समय पर प्रारंभिक कार्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक नए नियमों की मात्र अधिसूचना पर्याप्त नहीं होगी। पीठ ने टिप्पणी की, नए नियमों की शुरुआत एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे प्रभावी तिथि से पहले आवश्यक कार्य पूरा कर लें, अन्यथा 2026 के नियम जमीनी हकीकत में सुधार नहीं ला पाएंगे।

पीठ ने पक्षकारों के वकीलों की बातों को विस्‍तार से सुनने के बाद अपीलकर्ता निगम को दोनों अपीलों में केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को पक्षकार प्रतिवादी के रूप में शामिल करने का निर्देश देकर कार्यवाही के दायरे को व्यापक बनाने का प्रस्ताव रखा।

इसमें निर्देश दिया गया कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के सचिव, पंचायती राज मंत्रालय के सचिव, मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश के शहरी विकास और आवास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और मध्य प्रदेश के आवास और पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव को प्रतिवादी के रूप में जोड़ा जाए।

सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया, अपीलकर्ता को निर्देश दिया जाता है कि वह संशोधन करे और सुनवाई के अगले दिन या उससे पहले संशोधित कारण शीर्षक प्रस्तुत करे।ष् अपीलकर्ता के वकील को भारत संघ के केंद्रीय एजेंसी अनुभाग को अपील की प्रतियां सौंपने की अनुमति भी दी गई। मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को होगी।

Powered by Tomorrow.io

Advertisement

Ad

Related Post

Placeholder