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नई दिल्ली। अरावली पर्वतमाला के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपना लिया है। शीर्ष अदालत ने बुधवार को मामले पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को अगले आदेश तक यथास्थिति को बनाए रखने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार को अरावली में किसी भी अवैध खनन गतिविधि पर रोक सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है।
बुधवार को मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने मामले की सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में एक कमेटी बनाने के निर्देश दिए हैं। सीजेआई ने कहा कि कोर्ट और कड़ी निगरानी पर विचार कर रहा है। उन्होंने कहा, हम एक कमेटी बनाएंगे, जिसमें अपने-अपने क्षेत्र के एक्सपर्ट होंगे। यह कमेटी अरावली को लेकर रिपोर्ट देगी। कमेटी कोर्ट के निर्देश और गाइडेंस में काम करेगी।
किसानों की ओर से पेश वकील ने कोर्ट में रखा पक्ष
राजस्थान के किसानों की ओर से पेश वकील राजू रामचंद्रन ने कोर्ट को बताया कि जस्टिस ओका बेंच के 2024 के आदेशों के बावजूद खनन पट्टे दिए जा रहे हैं और पेड़ काटे जा रहे हैं। उन्होंने इस पर रोक की मांग की। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने चिंता जताई और कहा कि अवैध खनन को रोकना होगा। यह एक अपराध है।
अधिकारियों से दो टूक बोले CJI
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अधिकारियों से कहा कि आपको अपनी मशीनरी को काम में लाना होगा, क्योंकि अवैध खनन के विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार से कहा कि वह सुनिश्चित करें कि कोई गैरकानूनी खनन न हो। कोर्ट ने सभी पक्षकारों से पर्यावरणविदों, वैज्ञानिकों और माइनिंग एक्सपर्ट्स के नामों को लेकर सुझाव मांगे।
अरावली को परिभाषित करने के सवाल की अलग से होगी जांच
सुनवाई के दौरान बेंच ने स्पष्ट किया कि जंगलों और अरावली को परिभाषित करने के सवाल की जांच अलग से की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि दोनों मुद्दे अलग-अलग चिंताएं उठाते हैं और उन पर अलग से विचार करने की जरूरत होगी। जब एमिकस अपना नोट जमा कर देंगे, तब इस मामले पर सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने एमिकस क्यूरी के. परमेश्वर को अरावली की परिभाषा पर एक विस्तृत नोट फाइल करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है। पिछली सुनवाई में, सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों की परिभाषा में बदलाव से जुड़े अपने पिछले निर्देशों को रोक दिया था।
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