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नई दिल्ली। बसंत पंचमी हिंदू कैलेंडर में एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। यह दिन ज्ञान, संगीत, कला और विद्या की देवी माता सरस्वती को समर्पित है। बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक होने के साथ ही यह श्री पंचमी या सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन श्रद्धालु अज्ञानता, आलस्य और सुस्ती से मुक्ति पाने के लिए मां सरस्वती की उपासना करते हैं।
कई जगह छोटे बच्चों का बसंत पंचमी के दिन ही पहला अक्षर लिखवाने या विद्या आरंभ की परंपरा है। वहीं, स्कूलों में सुबह सरस्वती पूजा का आयोजन होता है। दृक पंचांग के अनुसार, 22 जनवरी की देर रात 1 बजकर 46 मिनट पर पंचमी तिथि शुरू होगी और अगले दिन तक रहेगी। नक्षत्र पूर्व भाद्रपद दोपहर 2 बजकर 33 बजे तक है, उसके बाद उत्तर भाद्रपद शुरू होगा। चंद्रमा कुंभ राशि में गोचर करेंगे। सूर्योदय 7 बजकर 13 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर मिनट पर होगा। पूरे दिन पंचक रहेगा।
वहीं, राहुकाल सुबह 11 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक है। इस दौरान कोई भी शुभ या नया कार्य न करें। अन्य अशुभ समय में यमगंड 3 बजकर 13 मिनट से 4 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक माना गया है। यह समय स्वयं सिद्ध मुहूर्त है, जिसमें पूजा करना अत्यंत फलदायी होता है।
शुक्रवार को ब्रह्म मुहूर्त 5 बजकर 26 मिनट से 6 बजकर 20 मिनट तक, अभिजीत मुहूर्त 12 बजकर 12 मिनट से 12 बजकर 54 मिनट तक और विजय मुहूर्त 2 बजकर 20 मिनट से 3 बजकर 2 मिनट तक है।
बसंत पंचमी पर माता सरस्वती की उपासना का विशेष विधान है। सबसे पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र (विशेषकर पीले रंग के) पहनें। पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें। लकड़ी की चैकी पर पीला वस्त्र बिछाकर मां सरस्वती का ध्यान करें। सबसे पहले गणपति की पूजा पहले करें। मां को गंगाजल से स्नान कराएं, फिर चंदन, रोली, कुमकुम, अक्षत और सिंदूर का तिलक लगाएं। पीले फूलों की माला, आम के पत्ते और शृंगार सामग्री अर्पित करें। पुस्तकें, कलम और वाद्य यंत्र उनके समक्ष रखें। पूजन के बाद ओम ऐं सरस्वत्यै नमः का कम से कम 108 बार जप करें। माता की आरती उतारें और भोग लगाएं।
मां सरस्वती को पीले रंग की चीजें प्रिय हैं। भोग में केसर युक्त हलवा, मालपुआ, बूंदी के लड्डू, केसरिया चावल, दूध से बनी मिठाई, तिल के लड्डू, पके केले, नारियल और पीली मिठाई, मालपुआ चढ़ाएं। फल, पीले फूल और गुलाल उनके चरणों में जरूर लगाएं।
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