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सिख विरोधी दंगों में बरी हुए सज्जन : कोर्ट के फैसले पर पीड़ित परिवारों का सामने आया दर्द, कहा- सरकार से नहीं थी ऐसी उम्मीद

कोर्ट के फैसले पर पीड़ित परिवारों का सामने आया दर्द, कहा- सरकार से नहीं थी ऐसी उम्मीद
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admin

Jan 22, 202601:09 PM

नई दिल्ली। दिल्ली में 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामले में पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार को बरी किए जाने के बाद पीड़ित परिवारों का दर्द और आक्रोश खुलकर सामने आया है। राऊज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज दिग्विजय सिंह ने गुरुवार को यह फैसला सुनाया, जिसके बाद अदालत परिसर में मौजूद पीड़ितों के परिजनों का गुस्सा फूट गया।

फैसले के बाद एक पीड़ित परिवार के सदस्य ने कहा, यह हमारे साथ बहुत बड़ा अन्याय है। अगर उन्हें बरी ही करना था, तो हमें इतने सालों तक इंतजार क्यों करवाया गया? हमारे बच्चों का क्या दोष था? घर के घर और परिवार के परिवार खत्म कर दिए गए। एक अन्य परिजन ने गुस्से और दुख के साथ सवाल उठाया, जिसने सिखों को चुन-चुन कर मारा, उसे बरी कैसे किया गया? हमें इस बात का बहुत दुख है कि सज्जन कुमार को बरी किया गया। सरकार ने हमारे साथ झूठे वादे किए। मेरे घर के 10 लोग दंगों में मारे गए। हम केस लड़ेंगे, पीछे नहीं हटेंगे।

पीड़ित परिवार बोले- हमें इंसाफ चाहिए

अदालत के फैसले की खबर मिलते ही पीड़ित परिवारों की एक महिला ने कहा, हमें सरकार से ऐसी उम्मीद नहीं थी। हमें इंसाफ चाहिए। अगर यह दोषी नहीं है, तो इतने सालों तक जेल में क्यों रखा गया? हमारे परिवार के लोग दंगों में मारे गए। मेरे पिता को मेरी आंखों के सामने जला दिया गया। हमारा पूरा परिवार खत्म हो गया। एक अन्य पीड़ित परिवार की महिला ने कहा, सरकार ने इसे बरी करके बहुत बड़ी गलती की है। हमें इंसाफ की उम्मीद थी, लेकिन आज तक नहीं मिला। सरकार ने हमारे साथ भेदभाव किया है। मेरे घर के कई सदस्य उस दंगे में मारे गए। सज्जन कुमार को जिंदा रहने का भी अधिकार नहीं है, उसे फांसी दी जानी चाहिए।

मामला सिख विरोधी दंगो से जुड़ा

यह मामला 31 अक्टूबर 1984 के बाद भड़के सिख विरोधी दंगों से जुड़ा है। उस दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख बॉडीगार्ड्स द्वारा हत्या के बाद दिल्ली समेत कई जगहों पर हिंसा भड़क उठी थी। राऊज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज दिग्विजय सिंह ने 78 वर्षीय सज्जन कुमार को दोषमुक्त करार दिया। पीड़ित परिवारों का कहना है कि वे न्याय के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे और इस फैसले के खिलाफ आगे भी कानूनी रास्ता अपनाएंगे।

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