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पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने की अपनी इच्छा सार्वजनिक कर दी है। इसके साथ ही उनके लंबे समय से अधूरे रहे एक राजनीतिक सपने के पूरा होने का रास्ता साफ हो गया है। नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि संसदीय जीवन की शुरुआत से ही उनके मन में यह इच्छा थी कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के भी दोनों सदनों के सदस्य बनें। इसी क्रम में उन्होंने इस बार होने वाले चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनने की इच्छा जताई है।
बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव में एनडीए की ओर से उम्मीदवारों के नाम लगभग तय माने जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार भाजपा की ओर से बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन और शिवेश राम को राज्यसभा भेजा जा सकता है, जबकि जेडीयू के कोटे से नीतीश कुमार और रामनाथ ठाकुर का नाम सामने आया है। दोनों नेता जल्द ही राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर सकते हैं।
नीतीश कुमार का राजनीतिक जीवन काफी लंबा और सक्रिय रहा है। वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों में रह चुके हैं। वे कई बार विधायक रहे हैं और विधान परिषद के सदस्य भी रह चुके हैं। इसके अलावा वे संसद के निचले सदन लोकसभा के भी सदस्य रह चुके हैं। हालांकि अब तक वे राज्यसभा के सदस्य नहीं बन पाए थे, जिस कारण यह एक अधूरी इच्छा मानी जाती थी। अब राज्यसभा पहुंचने के साथ ही उनका यह सपना भी पूरा हो जाएगा।
अपने संदेश में नीतीश कुमार ने बिहार की जनता को भरोसा दिलाया कि उनका राज्य के लोगों से जुड़ाव हमेशा बना रहेगा। उन्होंने कहा कि वे बिहार के विकास के लिए पहले की तरह प्रतिबद्ध रहेंगे और जो भी नई सरकार बनेगी, उसे उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा। उन्होंने विकसित बिहार बनाने के संकल्प को आगे भी जारी रखने की बात कही।
राज्यसभा पहुंचने के बाद नीतीश कुमार बिहार की राजनीति के उन चुनिंदा नेताओं की सूची में शामिल हो जाएंगे, जो चारों सदनों के सदस्य रह चुके हैं। इससे पहले लालू प्रसाद यादव और दिवंगत सुशील कुमार मोदी यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। ये दोनों नेता विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभाकृचारों सदनों के सदस्य रह चुके हैं।
अब यदि नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए निर्वाचित होते हैं, तो वे भी लालू प्रसाद यादव और सुशील कुमार मोदी के साथ उस खास राजनीतिक क्लब में शामिल हो जाएंगे, जिसके सदस्य देश में बहुत कम नेता हैं। इस तरह दशकों से मन में रही उनकी अधूरी राजनीतिक ख्वाहिश पूरी होने जा रही है।
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