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नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र की शुरूआत सोमवार से हो रही है, जिसमें 18वीं लोकसभा का छठा और राज्यसभा का 269वां सत्र शामिल है। यह सत्र 19 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें कुल 15 बैठकें होंगी। सत्र में विधायी और वित्तीय कार्यों पर फोकस रहेगा। सरकार सुधारों को बढ़ावा देने के लिए 13 बिल पेश करेगी, जिनमें परमाणु ऊर्जा, वित्तीय बाजार, शिक्षा और कर सुधार जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
माना जा रहा है कि संसद का शीतकालीन सत्र हंगामेदार रहने वाला है। विशेष पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) के दूसरे चरण, 'वोट चोरी' समेत कई मुद्दों को लेकर विपक्षी दल हंगामा कर सकते हैं। हालांकि विपक्ष के तेवर को देखते हुए सरकार ने रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई। बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। मीटिंग केंद्र और विपक्ष ने अपनी रणनीतियां स्पष्ट कीं।
सर्वदलीय बैठक के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, 'मैं सरकार की तरफ से विश्वास दिलाता हूं कि हम संसद के शीतकालीन सत्र को ठीक से चलाने के लिए विपक्ष के साथ बातचीत करते रहेंगे।' उन्होंने विपक्षी पार्टी के नेताओं से भी अपील की कि वे पार्लियामेंट को ठीक से चलाने में सहयोग करें।
सार्थक रही बैठक
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, बैठक बहुत अच्छी और बहुत सार्थक रही। मैं सभी पॉलिटिकल पार्टियों के फ्लोर लीडर्स को धन्यवाद देता हूं। सभी ने हिस्सा लिया और अपनी-अपनी पार्टी के विचार रखे। हम आज पॉलिटिकल पार्टियों के फ्लोर लीडर्स से मिले। सभी सुझावों पर विचार करेंगे और फिर उन्हें बिजनेस एडवाइजरी कमेटी के सामने पेश करेंगे। इस बैठक में 36 पॉलिटिकल पार्टियां और 50 नेता शामिल हुए।
सदन की कार्रवाई किसी तरह से बंद नहीं होनी चाहिए
किरेन रिजिजू कहा कि मैं सरकार की तरफ से आपको भरोसा दिलाता हूं कि हम संसद के शीतकालीन सत्र को ठीक से चलाने के लिए इसी तरह विपक्ष के साथ बातचीत करते रहेंगे। साथ ही मैं विपक्षी पार्टी के नेताओं से भी अनुरोध करूंगा कि वे पार्लियामेंट को अच्छी तरह से चलाने में सहयोग करें। लोकतंत्र में विशेषकर पार्लियामेंट्री डेमोक्रेसी में रुकावटें आती हैं। पॉलिटिकल पार्टियों में मतभेद होते हैं। सभी को अपनी-अपनी आइडियोलॉजी और एजेंडा के साथ काम करना होता है, इसलिए मतभेद होंगे। इन मतभेदों के बावजूद अगर हम सब तय करते हैं कि सदन को डिस्टर्ब नहीं करना है, जो भी विरोध करना है सदन में बात करके विरोध करना है और सदन की कार्रवाई किसी भी तरह से बंद नहीं करनी है।
संसदीय कार्य मंत्रालय के बुलेटिन के मुताबिक विधायी कार्यों में 13 बिल शामिल हैं।
1. जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) बिल, 2025: यह बिल 17 केंद्रीय कानूनों में छोटे अपराधों को गैर-आपराधिक बनाने और दंडों को तर्कसंगत बनाने का प्रयास करेगा। पहले अपराध पर चेतावनी देने का प्रावधान है, जो 10 मंत्रालयों के 76 अपराधों को प्रभावित करेगा। इससे कारोबार करने की आसानी बढ़ेगी।
2. इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (संशोधन) बिल, 2025: दिवालिया प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए संशोधन, जो कॉपोर्रेट रिकवरी को सुगम बनाएगा।
3. मणिपुर गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (दूसरा संशोधन) बिल, 2025: राज्य स्तर पर जीएसटी प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए, जो एक अध्यादेश की जगह लेगा।
4. रिपीलिंग एंड अमेंडिंग बिल, 2025: पुराने कानूनों को निरस्त करने और संशोधित करने का सामान्य बिल।
5. नेशनल हाईवे (संशोधन) बिल, 2025: भूमि अधिग्रहण को तेज करने के लिए, जिससे राजमार्ग परियोजनाएं तेजी से पूरी होंगी।
6. एटॉमिक एनर्जी बिल, 2025: परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने का महत्वपूर्ण बिल। यह 1962 के परमाणु ऊर्जा अधिनियम को अपडेट करेगा, जिसमें छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों पर जोर होगा। पीएम मोदी ने हाल ही में इसकी घोषणा की, जो ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा।
7. कॉपोर्रेट कानून (संशोधन) बिल, 2025: कंपनीज एक्ट 2013 और एलएलपी एक्ट 2008 में संशोधन, जो कारोबार की आसानी बढ़ाएगा।
8. सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड बिल (एसएमसी), 2025: सेबी एक्ट 1992, डिपॉजिटरीज एक्ट 1996 और सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स एक्ट 1956 को एकीकृत करेगा। इससे अनुपालन लागत कम होगी और विदेशी निवेश बढ़ेगा।
9. इंश्योरेंस कानून (संशोधन) बिल, 2025: बीमा क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए संशोधन।
10. आर्बिट्रेशन एंड कंसिलिएशन (संशोधन) बिल, 2025: विवाद निपटान को तेज करने के लिए।
11. हायर एजुकेशन कमीशन आॅफ इंडिया बिल, 2025: विश्वविद्यालयों को स्वायत्त बनाने और मान्यता प्रणाली को पारदर्शी करने का बिल, जो यूजीसी की जगह लेगा।
12. सेंट्रल एक्साइज (संशोधन) बिल, 2025: उत्पाद शुल्क प्रक्रिया में सुधार।
13. हेल्थ सिक्योरिटी टू नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल, 2025: स्वास्थ्य सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए नया सेस लगाने का प्रावधान।
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