Download App

Latest News

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर यूपी सरकार का नया दांव : डिप्टी सीएम ने बटुकों पर बरसाए फूल, सम्मान समारोह पर शंकराचार्य ने कसा तंजपन्नू हत्याकांड साजिश केस में निखिल गुप्ता दोषी करार : अमेरिकी संघीय कोर्ट का बड़ा फैसला, हो सकती है इतने साल की सजामप्र सरकार का बजट ज्ञानी नहीं अज्ञानी है, : कर्ज को लेकर नाथ ने किया तीखा प्रहार, कहा- हर साल 27 हजार करोड़ जा रहे सिर्फ ब्याज मेंमप्र बजट सत्रः भागीरथपुरा दूषित पानी मामले में गरमाई सदन की तासीर : मौतों को लेकर उमंग सिंघार ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप, मोहन-राजेन्द्र और कैलाश से मांगा इस्तीफा

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर यूपी सरकार का नया दांव : डिप्टी सीएम ने बटुकों पर बरसाए फूल, सम्मान समारोह पर शंकराचार्य ने कसा तंज

डिप्टी सीएम ने बटुकों पर बरसाए फूल,  सम्मान समारोह पर शंकराचार्य ने कसा तंज
a

admin

Feb 19, 202603:06 PM

लखनऊ। प्रयागराज के माघ मेला में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रशासन के बीच हुआ विवाद अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। मामले को लेकर विपक्ष ने यूपी सरकार पर तीखा हमला बोला था। हालांकि सरकार अब डैमेज कंट्रोल में जुट गई है। प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने गुरुवार को अपने आधिकारिक आवास पर बड़ी संख्या में बटुकों को आमंत्रित कर उनका सम्मान किया। इस दौरान बटुकों ने उन्हें फूल भेंट कर स्वागत किया और उनके समर्थन के लिए आभार जताया।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक द्वारा 101 बटुकों को सम्मानित किए जाने के कदम पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बटुकों के सम्मान को अपर्याप्त और विरोधाभासी करार दिया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने डिप्टी सीएम के सम्मान समारोह पर तंज कसते हुए कहा, क्या ऐसा करने से शांति हो जाएगी? आप किसी को मारते हो और फिर उस पर फूल चढ़ाते हो, यह कैसे संभव है?

स्वामी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मर्यादा वाले बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि बड़े पद पर बैठने से किसी को अन्याय करने का लाइसेंस नहीं मिल जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि गेरुआ वस्त्र धारण करने के बावजूद शासन में सनातन धर्म के प्रतीकों और शिखा का अपमान किया जा रहा है और हनक दिखाई जा रही है। उन्होंने न्याय न मिलने पर 11 मार्च को लखनऊ कूच करने का ऐलान किया है। इस बीच, सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने सरकार की देरी से जगी श्चेतनाश् पर सवाल उठाते हुए पाठक के इस्तीफे की मांग की है

बता दें कि विवाद की शुरुआत मौनी अमावस्या के दिन हुई, जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पालकी पर सवार होकर संगम में स्नान के लिए जा रहे थे। आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने उन्हें रोक लिया, जिसके बाद अधिकारियों से उनकी तीखी बहस हुई। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर आरोप लगाया था कि उन्हें संगम स्नान से रोका गया और बटुकों के साथ दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने कथित रूप से उन पुलिसकर्मियों की तस्वीरें भी दिखाईं, जिन पर चोटी खींचने का आरोप लगाया गया और इसी मुद्दे को लेकर वे धरने पर बैठ गए।

Powered by Tomorrow.io

Advertisement

Ad

Related Post

Placeholder