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भोपाल। मध्य प्रदेश के अशोक नगर के बारे में मिथक है कि जब भी किसी मुख्यमंत्री ने यहां का दौरा किया, उसे अपनी कुर्सी से हाथा धोना पड़ा। इस मिथक को लेकर पूर्व सीएम प्रकाशचंद सेठी, अर्जुन सिंह, श्यामाचरण शुक्ल, सुंदरलाल पटवा, मोतीलाल वोरा, लालू प्रसाद और दिग्गज कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह गिनाए जाते हैं। जो यहां आने के बाद अगले चुनाव में अपनी गद्दी से हट गए थे। इसी मिथक के चलते शिवराज सिंह चौहान ने डेढ़ दशक से अधिक समय तक मुख्यमंत्री पद पर रहते कभी अशोक नगर शहर का दौरा नहीं किया, लेकिन अब इस मिथक को सुबे मुखिया डाॅ. मोहन यादव ने तोड़ दिया है। वे रविवार को रंगपंचमी के मौके पर अशोकनगर पहुंचे और करीला धाम में आयोजित रंगपंचमी के कार्यक्रम में सहभागिता की।
बता दें कि जिला मुख्यालय अशोक नगर में अभी तक जिन मुख्यमंत्रियों ने दौरा किया उन्हें छह माह के भीतर अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी और अभी तक कई मुख्यमंत्री अशोक नगर का दौरा करने के बाद अपनी कुर्सी गवां चुके हैं। सुंदरलाल पटवा कॉलेज का उद्धाटन करने आए और 15 दिन बाद कुर्सी गंवानी पड़ी। उमा भारती जिला मुख्यालय के बायपास से गुजरी और तीन बाद उनकी कुर्सी पर संकट आ गया। दिग्विजय सिंह अशोक नगर को जिला मुख्यालय घोषित करने पहुंचे, जिसके बाद कांग्रेस आज तक सत्ता में नहीं लौटी। लालू प्रसाद यादव भी बतौर बिहार के मुख्यमंत्री यहां कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे, जिसके कुछ ही दिनों बाद राबड़ी देवी को गद्दी सौंपनी पड़ी।
अंतिम समय में बदल जाता था शिवराज का कार्यक्रम
माना जा रहा है कि अशोकनगर से जुड़े इस मिथक को देखते हुए मुख्यमंत्री रहते शिवराज सिंह चौहान ने एक बार भी यहां का दौरा नहीं किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का कई बार अशोकनगर का दौरा बना लेकिन अंतिम समय में उनका दौरा या तो स्थगित कर दिया गया अथवा स्थान बदल दिया गया। लेकिन अब इस मिथक को सीएम डाॅ. मोहन यादव ने तोड़ दिया है। उन्होंने करीला धाम में माता जानकी के दर्शन किए और भक्तों के साथ फूलों की होली खेली।
श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अदभुत संगम करीला धाम
वहीं कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम मोहन ने कहा कि अशोकनगर जिले का करीला धाम श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अदभुत संगम है। इस पावन स्थल पर माता सीता अपने दोनों पुत्र लव-कुश के साथ विराजमान हैं। यह देश का एक मात्र अद्वितीय मंदिर है, जहाँ माता सीता अपने दोनों पुत्रों के साथ पूजी जाती हैं। देश के अधिकांश मंदिर भगवान श्रीराम को समर्पित हैं। करीला धाम लव-कुश की जन्म-स्थली भी है, जो लव-कुश की बाल लीलाओं की साक्षी है। इस पवित्र स्थली के सम्पूर्ण विकास की योजना बनाई जायेगी।
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