Download App

Latest News

'धुरंधर-2' एक हजार करोड़ के क्लब में शामिल : अभी नहीं तोड़ पाई 'पुष्पा-2' और 'बाहुबली-2' का कलेक्शनगैस किल्लत पर कांग्रेस का दांव पड़ा उल्टा : शर्मा-नाथ के बयान का हवाला दे मोहन के मंत्री ने बोला जुबानी हमलामप्र में मौसम के बदले रुख पर आईएमडी का अलर्ट : आज 9 जिलों में ओले तो 33 जिलों में हो सकती है बारिश, पढ़ें खबरमप्र में एक लाख बच्चों को मिला मनपसंद स्कूलों में निःशुल्क प्रवेश : ऑनलाइन लॉटरी सिस्टम से प्रवेश में प्रदेश अग्रणी, बाकी को दूसरे चरण में मिलेगा मौका

नीमच में भक्ति‘-कला का अनुपम संगम : तुलसी के 14 पत्तों पर लिख दी संपूर्ण हनुमान चालीसा, छोटे से गांव के लाल ने किया कमाल

तुलसी के 14 पत्तों पर लिख दी संपूर्ण हनुमान चालीसा, छोटे से गांव के लाल ने किया कमाल
a

admin

Apr 03, 202603:24 PM

नीरज द्विवेदी

नीमच। मध्य प्रदेश के नीमच जिले के अंतर्गत स्थित छोटे से ग्राम कुंचड़ोद के प्रतिभाशाली सूक्ष्म कलाकार राहुल देव लोहार ने भक्ति और कला का ऐसा अनुपम संगम प्रस्तुत किया है, जिसे अपनी प्रकृति में विश्व का अद्वितीय प्रयास माना जा रहा है। राहुल ने परम पूज्य गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित संपूर्ण हनुमान चालीसा को तुलसी के पवित्र पत्तों पर अत्यंत सूक्ष्मता से अंकित कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

इस अद्भुत कलाकृति के सृजन के पीछे कलाकार का मुख्य उद्देश्य अपनी लघु कला के माध्यम से भारतीय संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाना तथा यह सिद्ध करना है कि बिना आधुनिक तकनीकों के भी दृढ़ एकाग्रता और साधना से बड़े लक्ष्य प्राप्त किए जा सकते हैं। चूँकि हनुमान चालीसा के रचयिता स्वयं गोस्वामी तुलसीदास जी हैं, इसी आध्यात्मिक भाव से प्रेरित होकर राहुल ने तुलसी के पत्तों को ही अपनी इस पावन कृति का आधार बनाया।

तुलसी के पत्तों पर अंकित संपूर्ण हनुमान चालीसा

श्रद्धा और आस्था से परिपूर्ण इस अद्भुत निर्माण की सबसे विशेष बात यह है कि राहुल ने बिना किसी लेंस या आधुनिक वैज्ञानिक उपकरण की सहायता के, केवल अपनी दृष्टि और स्वयं निर्मित एक-बाल (एकल रेशा) वाले सूक्ष्म ब्रश का उपयोग करते हुए तुलसी के 14 वास्तविक पत्तों पर हनुमान चालीसा की सभी 84 पंक्तियाँ अंकित की हैं। इस प्रक्रिया में शुद्धता का विशेष ध्यान रखा गयाकृपत्तों पर पहले चंदन का लेप किया गया, तत्पश्चात दीपक की प्राकृतिक कालिख और गोंद के मिश्रण से बनी स्याही का प्रयोग किया गया।

करीब 18 घंटों में सृजित हुई अद्भुत कृति

राहुल ने बताया कि इस उत्कृष्ट कलाकृति को तैयार करने में लगभग 15 से 18 घंटों का गहन मानसिक एवं शारीरिक परिश्रम लगा। भविष्य में इसे सुरक्षित रखने के लिए कृति को जिलेटिन से संरक्षित किया गया है। उनका उद्देश्य इस अनूठी साधना और कला के माध्यम से विश्व रिकॉर्ड स्थापित करना है, ताकि नीमच की पावन धरा की प्रतिभा और सनातन संस्कृति का गौरव विश्व पटल पर और अधिक उजागर हो सके।

Powered by Tomorrow.io

Advertisement

Ad

Related Post

Placeholder
नीमच में भक्ति‘-कला का अनुपम संगम : तुलसी के 14 पत्तों पर लिख दी संपूर्ण हनुमान चालीसा, छोटे से गांव के लाल ने किया कमाल